सीएमओ कार्यालय में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) की कुर्सी को लेकर चल रही अफसरों की खींचतान अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ने लगी है। इसका असर जिले की टीकाकरण व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर असर पड़ रहा है।
मई 2026 में डिप्टी सीएमओ डॉ. एमआई आलम से डीआईओ का प्रभार लेकर एसीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता को सौंपा गया था। अब डॉ. गुप्ता ने भी विभागीय असहयोग और लगातार विवाद के चलते यह जिम्मेदारी छोड़ने की इच्छा जताई है।
डीआईओ का पद बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, नए वैक्सीन के क्रियान्वयन, कोल्ड चेन प्रबंधन तथा झोलाछाप व अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई के लिए अहम माना जाता है। प्रभार बदलने के बाद विभाग दो गुटों में बंट गया और अधिकारियों के बीच समन्वय बिगड़ गया।
स्थिति यह है कि नियमित टीकाकरण, माइक्रो प्लानिंग और एएनएम-आशा कार्यकर्ताओं की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। डॉ. एमआई आलम आधिकारिक प्रभार न होने के बावजूद अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई और हालिया पोलियो अभियान में सक्रिय रहे, जबकि प्रगति रिपोर्ट मांगे जाने पर उन्होंने खुद को नोडल अधिकारी मानने से इनकार कर दिया। वहीं, डॉ. राजीव गुप्ता फिलहाल केवल एचपीवी वैक्सीन कार्यक्रम का कार्य देख रहे हैं।
डीआईओ का चार्ज डाॅ. राजीव गुप्ता पर ही है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी का चार्ज डा. राजीव गुप्ता पर ही है। विभाग में किसी तरह की खींचतान नहीं है और न ही कोई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जनहित में सभी मिलकर काम कर रहे हैं।
-डाॅ. वेदप्रकाश अग्रवाल, सीएमओ