सरकारी दावों और विकास की पोल खोलती एक हैरान करने वाली तस्वीर हाथरस जंक्शन के गांवों से सामने आई है। यहां औंदुआ ग्राम पंचायत के दो गांव नगला नत्थू और औंदुआ के ग्रामीण गंदे पानी की निकासी पर सालों से आमने-सामने हैं। नगला नत्थू में आठ साल से मुख्य मार्ग पर जलभराव है। गांव में सरकारी पोखर नहीं है, जबकि औंदुआ के लोग उन्हें अपने पोखर में पानी छोड़ने नहीं दे रहे।
नगला नत्थू के मुन्नालाल का कहना है कि औंदुआ के ग्रामीणों के विरोध के चलते गांव के पानी की निकासी नहीं हो पा रही, जबकि गांव औंदुआ के रोहित कुमार का कहना है कि नगला नत्थू में भी पोखर थी, जिस पर कब्जा हो चुका है। अब जब पानी निकासी की समस्या आई तो हमारे गांव के पोखर पर नजर है। इसी वजह से हमारे गांव के लोग विरोध कर रहे हैं।
ये दोनों गांव एक ही पंचायत में हैं। ग्राम पंचायत औंदुआ में औंदुआ के साथ नगला नत्थू व मिरगामई गांव आते हैं। नगला नत्थू की आबादी लगभग एक हजार है, जबकि 200 घरों का पानी नाली की बजाय सड़क पर बह रहा है। सालों से जलभराव के चलते सड़क गंदे नाले में बदल चुकी है और पटरी पर घास उग चुकी है। जिला पंचायतराज अधिकारी राकेश बाबू ने बताया कि समस्या को दिखवाया जाएगा, जो भी समाधान होगा, उसे तत्काल कराया जाएगा।
औंदुआ में 11 बीघा में पोखर, नगला नत्थू में कब्जा
ग्राम प्रधान मानिकचंद्र ने बताया कि गांव औंदुआ में करीब 11 बीघा की एक बड़ी पोखर है। प्रशासन ने गांव नगला नत्थू के पानी को बाहर निकालने के लिए नाली का निर्माण कराया था, ताकि पानी औंदुआ की पोखर में जा सके, लेकिन औंदुआ के लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कई बार विवाद सामने आ चुका है। औंदुआ के ग्रामीणों का तर्क है कि पहले नगला नत्थू का पोखर कब्जा मुक्त कराया जाए। पहले वहां पानी छोड़ा जाए। उस पोखर से जब पानी निकले तो उसे उनके पोखर में छोड़ा जाए। ग्राम प्रधान के अनुसार गांव नगला नत्थू में 250 वर्ग गज का छोटा पोखर है, जिस पर कब्जे की बात सही है। कब्जा हटाने के प्रयास में और विवाद की स्थिति बनेगी।
नरक बनी जिंदगी, बच्चे हो रहे हादसे का शिकार
इन दो गांवों की खींचतान का खामियाजा नगला नत्थू के लोग भुगत रहे हैं। गांव के बनी सिंह ने बताया कि मुख्य मार्ग पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से यह पूरी आबादी प्रभावित हो रही है। आए दिन स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे इस गंदे पानी और कीचड़ में गिरकर जख्मी हो जाते हैं। स्थानीय लोगों को न केवल आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि लंबे समय से जमा इस गंदे पानी के कारण गांव में भयंकर बीमारियां फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है।
शिकायत पर सुनवाई नहीं
गांव नगला नत्थू के भगवान सिंह का कहना है कि गांव में पोखर था, लेकिन वह वर्षों पहले लुप्त हो चुका है। पुराने लोगों को ही नहीं पता पोखर कहां था। जलभराव की समस्या की प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।