ओमवती ने सोमवार को घर पहुंचे अधिकारियों को रोते हुए बताया कि वह अपनी बेटी के मृ़त बच्चा पैदा होने से काफी दुखी थीं, लेकिन नर्स ने उनकी एक बात भी नहीं सुनी और खर्च के नाम पर 950 रुपये ले लिए। वह रोती रहीं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने नर्स से कहा था कि अगर उनकी बेटी का बच्चा सही सलामत होता तो वह अपने मन से रुपये देतीं। गांव अहरई की आशा कार्यकर्ता महेंद्री ने बताया कि गर्भवती महिला के परिजनों से स्टाफ नर्स ने एक हजार रुपये की मांग की थी। तीन बार में स्टाफ नर्स को रुपये दिए गए और कुछ रुपये अन्य स्टाफ को भी दिए गए।
प्रसव के दौरान रुपये लेने के मामले में दो स्टाफ नर्स का तबादला कर दिया गया है। स्टाफ नर्स नीतू को महौ व स्टाफ नर्स दीपिका चौधरी को सहपऊ भेज दिया गया है। गांव की आशा को खुली बैठक कर निष्कासित किया जाएगा।-डॉ. मंजीत सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी
समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ.मंजीत सिंह ने जांच टीम बनाई है। हम लोगों ने परिवार के बयान दर्ज कर लिए हैं। अभी स्टाफ के लोगों के बयान भी दर्ज होने हैं। परिवार वाले अलग-अलग लोगों द्वारा रुपये लेने की बात बता रहे हैं। इसकी सत्यता जानी जा रही है।-डॉ. आरके अग्निहोत्री, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी