तेज बुखार से पीड़ित 4-5 महीने के हतांश को 21 मई की शाम 5.50 मिनट 31 किलोमीटर दूर सहपऊ के गांव सेंदरिया से जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। बच्चा छोटा था और दिमागी बुखार से तप रहा था, लेकिन यहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं थे। इमरजेंसी में 10 मिनट का औपचारिक प्राथमिक उपचार देकर बच्चे को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन बिलखते हुए बच्चे को गोदी में समेट आगरा ले गए।
यह वाकया जिला अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर की कमी से पैदा हो रहे गंभीर हालातों को बयां करने के लिए काफी है। अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) पर हर बार की तरह ताला लटका रहा। आगरा के निजी अस्पताल ने हतांश को तो बचा लिया, लेकिन चंदपा के कुंवरपुर की नौ साल की प्रवेश की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी, जिसने 18 मई की सुबह अस्पतालों की तलाश में दम तोड़ दिया था।
धूल फांक रहा 94.46 लाख से बना पीआईसीयू भवन
कोराना काल में बनाई गई इमरजेंसी रेस्पांस एंड हेल्थ सिस्टम प्रिपेयरडनेस पैकेज (ईसीआरपी) फेज वन के तहत प्रदेश में पीआईसीयू यूनिट के प्रस्ताव जनवरी 2022 में स्वीकृत हुए थे। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद ने जिला अस्पताल में पीआईसीयू का भवन बनाना शुरू किया। 94.46 लाख रुपये से तैयार हुई एक मंजिला यूनिट 2023 में तैयार होकर सीएमओ को हैंडओवर हुई और फिर 2025 में सीएमएस के सुपुर्द कर दी गई।
ताले में बंद उपकरण
इस अत्याधुनिक यूनिट में वह सब मशीनें हैं, जो बच्चों की जीवन रक्षा के लिए जरूरी होती हैं। शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से ही इसका निर्माण हुआ। इस 32 बेड के अस्पताल में चार वेंटिलेटर, 20 एचडीयू बेड (हाई डिपेंडेंसी यूनिट), आठ सामान्य बेड, अन्य जीवन रक्षक प्रणाली व यंत्र अंदर बंद हैं और धूल फांक रहे हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी से रोजाना तीन से चार बच्चे रेफर किए जा रहे हैं, लेकिन स्टाफ न मिलने के कारण यूनिट चालू नहीं हो पा रही।
यह चाहिए स्टाफ
पीआईसीयू के संचालन के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की आवश्यकता है। इनके अलावा आईसीयू ड्यूटी में आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) और हर शिफ्ट में तीन-तीन स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय होने चाहिए।
एसएनसीयू भी ओवरलोडेड, स्टाफ की कमी
जिला महिला अस्पताल स्थित स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में केवल 12 बेड हैं। सीएसआर फंड के जरिये तीन अतिरिक्त बेड का इंतजाम किया गया है। शुक्रवार को ये सभी बेड फुल थे। महिला अस्पताल में रोजाना 10 से 12 बच्चे जन्म लेते हैं। इसके अलावा सीएचसी व निजी अस्पताल से भी बच्चे रेफर होकर आते हैं। बेड कम होने से रोजाना दो से तीन बच्चे भर्ती नहीं हो पाते। एसएनसीयू में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है, जबकि यहां दो की तैनाती है। महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप ही एसएनसीयू की देखरेख कर रहे हैं। इनके अलावा तीन ईएमओ हैं।
पीआईसीयू के संचालन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। लगातार पत्राचार किया जा रहा है। कुछ दिनों पहले ही बाल रोग विशेषज्ञ व सपोर्टिंग स्टाफ की उपलब्धता के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस