कलेक्ट्रेट परिसर से आपदा मित्रों व स्वयंसेवकों के वाहन को डीएम अतुल वत्स ने बृहस्पतिवार की सुबह एसडीआरएफ प्रशिक्षण केंद्र लखनऊ के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जिले से चयनित 50 स्वयंसेवकों को 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण के लिए राज्य आपदा मोचन बल मुख्यालय लखनऊ भेजा गया। डीएम ने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टीम की उपलब्धता त्वरित एवं प्रभावी राहत कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के बाद ये युवा जिले में आपदा जोखिम प्रबंधन को और मजबूत बनाएंगे।
जिला आपदा विशेषज्ञ लेखराज ने बताया कि यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आगजनी, बाढ़, बिजली, सर्पदंश एवं भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक चिकित्सा, खोज, बचाव और राहत कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूर्ण होने पर आपदा मित्रों को आपदा किट एवं बीमा पॉलिसी भी उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि आपदा मित्र परियोजना के तहत जिले से अब तक 79 आपदा मित्रों को प्रशिक्षण के लिए लखनऊ भेजा जा चुका है। जिले के कुल 100 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया जाना है, जिनमें से शेष 21 स्वयंसेवकों को भी बृहस्पतिवार को प्रशिक्षण के लिए रवाना किया गया।
आपदा राहत प्रबंधन के लिए वर्ष 2025-26 में जारी किए 710.12 करोड़ रुपये
उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़, भूकंप, सूखा, अग्निकांड, शीतलहर एवं मानव-जीव संघर्ष जैसी आपादाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा राहत निधि के तहत 710.12 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई। इसमें सर्वाधिक 365.73 करोड़ रुपये बाढ़ प्रभावितों के बचाव के लिए जारी किए गए। इसे विशेष रूप से सरयू, गंगा और घाघरा के बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास पर खर्च किया गया। चक्रवात व आंधी-तूफान से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए 14.13 करोड़, ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए 0.13 करोड़, अग्निकांड में क्षतिपूर्ति के लिए 14.63 करोड़ रुपये और शीतलहरी से बचाव के लिए 50.72 करोड़ रुपये जारी किये गये। राज्य सरकार द्वारा अन्य आपदाओं के लिए लगभग 246.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।