अब व्यापारी और उद्यमी जीएसटी अधिकारियों की कार्यशैली का आकलन कर सकेंगे। इसके लिए जीएसटीएन पोर्टल पर रेटिंग सिस्टम लागू किया गया है। नोटिस या प्रकरण के निस्तारण के बाद संबंधित अधिकारी के कार्य व्यवहार और कार्यप्रणाली पर फीडबैक दिया जा सकेगा।
इसके अंतर्गत एएसएमटी-10, डीआरसी-01, आईटीसी या डिमांड से जुड़े मामलों के निपटारे के बाद पोर्टल पर रेटिंग का विकल्प दिया जा रहा है। इसमें व्यापारी अपनी संतुष्टि के आधार पर अंक दे सकते हैं। चाहें तो व्यक्तिगत टिप्पणी भी दर्ज कर सकते हैं। यह रेटिंग उस स्तर के अधिकारी के लिए होगी, जिस अधिकारी के कार्यक्षेत्र में फर्म पंजीकृत है। मसलन, डीसी, एसी और सीटीओ। इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विभाग और करदाताओं के बीच संवाद बेहतर होगा तथा अनावश्यक विवादों में कमी आएगी। व्यापारियों ने इस पहल का स्वागत किया है।
हाल ही में पोर्टल पर यह सुविधा शुरू हुई है। इसमें स्टॉर रेटिंग के छह-सात विकल्प दिए गए हैं, जिनके द्वारा अपना फीडबैक दिया जा सकता है।
-गिरीश शर्मा, वरिष्ठ कर अधिवक्ता।
अब अधिकारी भी समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से कार्य करेंगे, क्योंकि उनकी रेटिंग सीधे पोर्टल पर दर्ज होगी। यह शुरुआत अच्छी है। शुरुआत देर से हुई।
-तरुण पंकज, व्यापारी नेता।
नोटिस के निस्तारण के बाद फीडबैक देना स्वागत योग्य कदम है। इससे ईमानदार करदाताओं को राहत मिलेगी, उन्हें भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
-कपिल अग्रवाल, वरिष्ठ व्यापारी नेता।
रेटिंग सिस्टम से जवाबदेही बढ़ेगी। उम्मीद है कि इससे विभाग और व्यापारियों के संबंध और बेहतर होंगे, लेकिन ये तब ही मुमकिन है, जब इस फीडबैक पर कार्रवाई हो।
-प्रवीण वाष्र्णेय, व्यापारी नेता।