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Hathras: गंभीर समस्याओं पर व्यापारियों ने किया संवाद, बोले-नगर पालिका समझे जिम्मेदारी, तभी दूर होगी परेशानी

Sun, 30 Nov 2025 01:01 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

संवाद में हाथरस जिले में साप्ताहिक बंदी को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। जीएसटी की तकनीकी खामियों और उनसे व्यापारियों को होने वाली मुश्किलों को भी मजबूती से उठाया गया।
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अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा नयागंज स्थित आंधीवाल पैलेस में आयोजित व्यापारी संवाद में शामिल व्यापारी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हाथरस के नयागंज स्थित आंधीवाल पैलेस में हुए अमर उजाला के व्यापारी संवाद में शहर की गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। व्यापारियों ने अतिक्रमण, जाम, गंदगी, जलभराव, स्ट्रीट लाइटें खराब होने, पानी की पाइप लाइनों की लीकेज और बंदरों के खौफ को सबसे बड़ी समस्या बताया। व्यापारियों ने मांग उठाई कि नगर पालिका अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए, ताकि शहर को इन समस्याओं से निजात मिल सके।

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इस संवाद में हाथरस जिले में साप्ताहिक बंदी को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। जीएसटी की तकनीकी खामियों और उनसे व्यापारियों को होने वाली मुश्किलों को भी मजबूती से उठाया गया। व्यापारियों ने बताया कि कर चोरी की आशंका में पकड़े गए वाहनों के मामले में अपीलीय सुनवाई वहीं होती है, जहां मामला दर्ज होता है। ऐसे में छोटे-छोटे मामलों में व्यापारी पैरवी नहीं कर पाते और सही होने के बाद भी नुकसान झेलते हैं। इसका निदान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि मूलभूत समस्याओं का समाधान हो तो व्यापार और भी बढ़ेगा और शहर की छवि बेहतर होगी।

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व्यापारी बोले

हाथरस शहर में 50 साल से अधिक पुरानी सीवर लाइन है, जो बिल्कुल खराब हो चुकी है। इस पर 50 साल से कोई काम नहीं किया गया। सीवर, नाली और नाले खुले हैं, इस पर काम होना चाहिए।-संजीव आंधीवाल।
शहर में डाली गई पाइपलाइन से जगह-जगह लीकेज हो रहा है। बंदरों का खौफ और जाम की समस्या गंभीर है। भू माफिया सक्रिय हैं, जो नगर पालिका में दर्ज जमीनों में विवाद पैदा कर कब्जा कर रहे हैं।-तरुण पंकज।
नगर पालिका की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा। निराश्रित पशु इधर-उधर घूम रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़ने पर ध्यान नहीं है। नगर पालिका को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-रवि वार्ष्णेय।
कोरोना काल के बाद से ही साप्ताहिक बंदी का पालन नहीं हो रहा है, जबकि कोरोना काल बीते लंबा समय हो गया है। व्यापार पटरी पर आ चुके हैं, साप्ताहिक बंदी दुकानदारों-कामगारों के लिए बेहद जरूरी है।-शंकर गोयल।
अलीगढ़ रोड हो या आगरा रोड, नाले खुले पड़े हैं। सफाई के नाम पर सिल्ट निकाल कर बाहर डाल दी जाती है, लेकिन नालों को बंद नहीं किया जाता। नगर पालिका नालों की तली छाड़ सफाई नहीं करा पा रही है।-कमलकांत दोबरावाल।
नगर पालिका के पास पूरे शहर की जिम्मेदारी है, लेकिन वह जिम्मेदारी नहीं समझ रही। हजारों बंदरों का खौफ इस कदर है कि आम आदमी अपनी छत पर भी मुश्किल से जाता है, रास्तों पर चलना मुश्किल हो गया है।-सुखवीर सिंह।
सड़कों पर लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है। दूसरी ओर अतिक्रमण से सड़कें संकरी हो रही हैं। जिससे जाम बढ़ रहा है। नगर पालिका अतिक्रमण हटवाए। इस पर काम किया जाना बेहद आवश्यक है।-प्रदीप बंसल।
जीएसटी विभाग की ओर से कार्रवाई तो की जा रही हैं, लेकिन व्यापारियों को पता ही नहीं कि जीएसटी थ्री बी क्या है, डीआरसी कब और क्यों जारी होती है। व्यापारियों को नियम के प्रति जागरूक किया जाए।-कन्हैया शर्मा।
जीएसटी में फर्जी शिकायतों का बोलबाला है। अधिकारी फर्जी शिकायतों की आड़ में व्यापारियों को परेशान करने से बाज नहीं आ रहे। जीएसटी के नियमों में परिवर्तन होना चाहिए। सीधे छापा मारना गलत है।-सुरेश अग्रवाल।
पाइपलाइन लीकेज की समस्या पर गंभीरता से काम होना चाहिए। पाइपलाइन डालने में जो सड़कें खोदी गईं, उनमें पुरानी ईंटे लगा दी गईं। अगर पुराने से ही काम होना था तो सीसी रोड का बजट कहां से आया।-योगा पंडित।
विद्युत विभाग की ओर से शहर में नये खंभे लगा दिए गए हैं, लेकिन पुराने नहीं हटाए गए। नये खंभे पुराने से 4-4 फीट आगे लगाए गए हैं, जबकि पुराने की जगह पर ही लगाए जाते तो सड़कें संकरी नहीं होती।-विष्णु गौतम।
महंगाई व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि अब व्यापारी काम शुरू करने के लिए महंगी जमीन की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। 10 लाख वाली जमीन एक करोड़ की हो गई। नये काम कैसे शुरू होंगे।-सुरेंंद्र कुमार बांठिया।
नगर पालिका की ओर से शहर में कई नई सड़कें बनाई गई हैं, लेकिन इन सड़कों पर सफाई नहीं हो रही है। सिर्फ निर्माण कार्य करा कर छोड़ दिया गया। अब इन सड़कों पर धूल उड़ती हैं, जिससे जीना मुहाल है।-सुरेन्द्र वार्ष्णेय।
शहर के मार्गों पर जाम लगा रहता है, लेकिन निस्तारण के लिए डिवाइडर व गोल चक्कर बनाने की ओर ध्यान नहीं है। अगर डिवाइडर बने तो लोगों को जाम से निजात मिल सकती है।-योगेश वार्ष्णेय।

नगर पालिका श्मशान जाने वाला रास्ते को ठीक नहीं कर रही है। इसे सुधारे जाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। इस रास्ते में अक्सर जलभराव रहता है, जिससे लोगों को बहुत दिक्कत होती है।-ललतेश गुप्ता।
घंटाघर का जीर्णोद्धार हुए लंबा समय हो गया है, लेकिन आज तक इसके नीचे का रास्ता सुचारू नहीं किया गया है। यहां रास्ता बंद होने के कारण भी जाम की स्थिति रहती है। इसे ठीक किया जाए।-राजकुमार सर्राफ।
ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बदहाल है। चालान से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। ट्रांसपोर्ट नगर बसे तो शहर से ट्रकों का परिवहन कम हो सकेगा। इससे जाम की समस्या भी कम होगी और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।-प्रदीप सारस्वत।
सभी काॅलोनियों से नगर पालिका को कूड़ा उठाना चाहिए, लेकिन कूड़ा जलाया जाता है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है।-नवजोत शर्मा।
मुख्य मार्गों का हाल खराब है। एसबीआई की मुख्य शाखा के बाहर अतिक्रमण है। फुटपाथ को रेलिंग से घेरा हुआ है। राहगीरों को दिक्कत हो रही है। बुर्ज वाला कुआं की पुलिया सही नहीं हुई है।-राहुल गुप्ता।
लोहट बाजार में कई जगह विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे। मरम्मत से लाइनें ठीक नहीं हो पा रही है। यहां पर कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है।-सुभाष चंद्र शर्मा।
लंबे समय से उद्यमियों को कारोबार के लिए जगह नहीं मिल रही है। हालात यह हैं कि सलेमपुर में जमीन होने के बाद भी उद्यमियों को नहीं दी जा रही। स्थानीय स्तर पर कारोबार सुस्त पड़ रहा है।-संजीव वर्मा।
वाहनों की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है, छोटी संकरी गलियों में तेजी से बाइकें दौड़ रहीं हैं। सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, फिर भी स्पीड ब्रेकर नहीं बन रहे। चेयरमैन-सभासदों के बीच तालमेल नहीं है।-सास्वत शर्मा।
स्ट्रीट लाइटें बंद होने से गलियों और सड़कों पर अंधेरा है, जिससे चोरी की घटनाएं होती हैं। रात के समय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जाम से भी दिक्कत अधिक होती है।-रमन गुप्ता।
अस्पतालों और शापिंग कांप्लेक्स का निर्माण तेजी से हो रहा है, लेकिन पार्किंग की सुविधा नहीं है। घंटाघर, बैनीगंज में दुकान खोलने से पहले दुकानदारों को वाहन हटवाने पड़ते हैं। हम परेशान हैं।-योगेश वार्ष्णेय।
नए भवनों के निर्माण में विनियमित क्षेत्र सख्ती नहीं कर रहा, मनमाने ढंग से निर्माण हो रहा है। नक्शा है, लेकिन मौके पर वाहन खड़ा करने तक की जगह नहीं है, जिससे परेशानी होती है।-प्रभात वार्ष्णेय।
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