गो पालक ही गायों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। खासतौर पर ऐसे लोग जो गाय और गोवंश को रेलवे पटरी के किनारे बांध रहे हैं। रस्सी खुलने अथवा खोले जाने पर गाय और गो वंश घूमते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाती हैं।
तीन माह में करीब 25 गाय और गोवंश ट्रेन की चपेट में आकर मर चुके हैं। इससे आक्रोशित गो सेवकों ने शनिवार को रेलवे स्टेशन पहुंचकर स्टेशन मास्टर के जरिये रेल मंत्रालय को पत्र भेजा है। शहर में पटरियों किनारे बाड़ लगाने की मांग की है ताकि गाय और गोवंश को ट्रेन की चपेट में आने से सुरक्षित किया जा सके।
गो सेवक शिवशंकर गुलाठी और अभिषेक रंजन आर्य के अनुसार शहर क्षेत्र में होकर गुजर रही रेलवे पटरियों के सहारे गाय बांधी जा रही है। यह गाय खुलने पर ट्रेन की चपेट में आ जाती हैं।
गो सेवकों के ज्ञापन में रेलवे प्रशासन से पटरियों के सहारे पशुआें को बांधने से रोकने की आवाज उठाई गई। मांग की रेलवे प्रशासन को पटरियों के सहारे पशुआें को बांधने से रोकना चाहिए। पटरियों के सहारे जहां बैरीकेटिंग नहीं है, वहां बैरीकेटिंग कराई जाए।
गायों की रक्षा के लिए सख्त कदम की जरूर
गो सेवकों की ओर से दिए गए ज्ञापन में गाय और गोवंश की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की आवाज उठाई गई। कहा गया कि ट्रेन की चपेट में गायों के मरने से रोकने को जल्द उपाय न हुए तो आंदोलन पर विवश होंगे।
ज्ञापन देने वालों में मनोज उपाध्याय, गोविंदा शर्मा, अंकुर राजौरिया, सौरभ अग्रवाल, हितेश गोस्वामी आदि शामिल थे।