क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी टीकाराम पुजारी ने देश की स्वतंत्रता की खातिर न जाने कितनी यातनाएं झेलीं। ग्राम ऊंचागांव रसमई (मथुरा) निवासी टीकाराम पुजारी सत्याग्रह आंदोलन में कूद पड़े थे। उन्होंने 1930 में छह माह और सन 1932 में एक वर्ष कैद की सजा पाई।
व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण सन 1941 में एक वर्ष कैद और 200 रुपये जुर्माने की सजा पाई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सन 1942 में नजरबंद किए गए। आजादी के बाद वर्ष 1957 में सादाबाद क्षेत्र के विधायक भी रहे। उनकी आखिरी इच्छा यही थी कि उनके परिवार को राष्ट्रीय परिवार घोषित किया जाए। टीकाराम पुजारी के परिवार में से ही 10 और सदस्य स्वतंत्रता सेनानी रहे।
इन्होंने भी दिया बलिदान
गांव सुसाइन ऊंचागांव के रोशनलाल आर्य पुत्र चतुरी सिंह और नंद किशोर गौतम ने पूर्व में हैदराबाद राज्य में आर्य समाज आंदोलन में भाग लिया और 1938-39 में एक-एक साल का कारावास भोगा था। कुंवरसेन पुत्र शोभाराम के व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण 1941 में एक वर्ष की कैद और 10 रुपये जुर्माने की सजा पाई थी। डालचंद्र कुशवाहा ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण 1932 में छह माह कारावास की सजा पाई थी। बिहारी सिंह पुत्र तुलाराम ने सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने कारण एक साल की जेल और 10 रुपये जुर्माने की सजा पाई थी। इसके अलावा लौहरे सिंह, भंवर सिंह और भूप सिंह ने भी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था।