जनपद में अपराधियों पर लगाम कसने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए पुलिस ने यक्ष एप से डिजितटल निगरानी शुरू कर दी है। अपराधियों का डेटाबेस तैयार करने के बाद अब इसमें बीट सिपाही मॉड्यूल को सक्रिय कर दिया गया है। इसके तहत क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और संदिग्ध घटनाओं को सीधे एप पर दर्ज किया जा रहा है। अब तक 983 सूचनाएं दर्ज हुईं हैं और 823 पर अंतिम रिमार्क किया गया है। इससे पुलिसिंग की पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ी है।
निगरानी का त्रि-स्तरीय घेरा
यक्ष एप की सबसे बड़ी खूबी इसका त्रि-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम है। बीट सिपाही द्वारा सूचना दर्ज किए जाने के बाद उस पर हल्का-चौकी प्रभारी और थाना प्रभारी अपनी टिप्पणी देते हैं। अंत में क्षेत्राधिकारी द्वारा किए गए रिमार्क को अंतिम माना जाता है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। वे तय करते हैं कि निगरानी की आवश्यकता है या नहीं। इस प्रक्रिया से किसी भी सूचना को दबाना या नजरअंदाज करना अब मुमकिन नहीं होगा।
एक हफ्ते में 823 सूचनाएं सीओ तक पहुंचीं
जिले में 586 बीट सिपाही हैं। बीते एक हफ्ते में पूरे जिले में 983 बीट सूचनाएं अंकित की गई हैं, जिनमें 823 सूचनाओं पर संबंधित क्षेत्राधिकारी अंतिम रिमार्क दे चुके हैं। यानी ये मामले पूरी तरह निगरानी में आ चुके हैं। इनमें से गंभीर मामलों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इस डिजिटल पहल से न केवल बीट सिपाहियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि उच्चाधिकारियों को एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि किस इलाके में किस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
थानेवार दर्ज की गईं बीट सूचना
थाना अंकित सूचना
कोतवाली शहर 100
सादाबाद 151
हाथरस गेट 139
सासनी 112
हाथरस जंक्शन 105
चंदपा 97
सिकंदराराऊ 96
मुरसान 76
हसायन 64
सहपऊ 43
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कुल 983
यक्ष एप के जरिये अपराध नियंत्रण में मदद मिल रही है। कई घटनाओं का एप से पर्दाफाश हो रहा है। अपराधियों का डाटा फीड होने के बाद बीट आरक्षी मॉड्यूल शुरू कर दिया गया है। बीट सिपाही को हर घटनाक्रम की सूचना अपडेट करनी होगी, ताकि उसकी निगरानी की जा सके। सूचना अंकित न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
-रामानंद कुशवाहा, एएसपी