हाथरस। ब्लॉक प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया इसी हफ्ते में शुरू हो जाएगी। पांच फरवरी से प्रमुख पद के लिए नामांकन होंगे और सात फरवरी को सातों ब्लॉकों में प्रमुख पद के लिए चुनाव होना है। राजनीतिक दलों के साथ जिला प्रशासन भी इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव की तैयारी में जुट गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस चुनाव में धन और बाहुबल का खुला खेल रोकने की है, लेकिन इस चुनौती पर पार पाने में प्रशासन नाकाम ही दिख रहा है। पर्दे के पीछे सभी राजनीतिक दल प्रमुख के पदों पर कब्जा करने के लिए हर हथकंडा आजमा रहे हैं। धनबल और बाहुबल का खुलकर इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस इसे रोक नहीं पा रहे।
बीडीसी सदस्यों के परिजनों की बढ़ी चिंताराजनीतिक दलों की खींचतान में सबसे ज्यादा आफत बीडीसी सदस्यों की आ गई है। कुछ सदस्य तो प्रमुखी के दावेदारों के कब्जे में है, जबकि कुछ सियासी दबाव से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए हैं, फिर भी उनके परिजनों को यह चिंता सता रही है कि कहीं राजनीतिक दिग्गजों के बीच चल रही बहुमत जुटाने की होड़ का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना पड़ जाए। इन सदस्यों के परिजन प्रशासन से बराबर सुरक्षा की गुहार भी लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन चाहते हुए भी इनकी हिफाजत नहीं कर पा रहा। ऐसे में चुनाव तक इन बीडीसी सदस्यों के लिए दिग्गजों की पहुंच से दूर रहना बेहद जरूरी हो गया है।
दिग्गजों के सामने वर्चस्व की चुनौतीजिला पंचायत अध्यक्ष की तरह प्रमुखी का चुनाव भी सपा और बसपा के बीच वर्चस्व की जंग में बदलता दिख रहा है। दोनों ही खेमों के सामने विधानसभा चुनाव से पहले खुद का वर्चस्व साबित करने की चुनौती है। ऐसे में दोनों के ही दिग्गज ज्यादा से ज्यादा प्रमुख पदों पर कब्जा करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। और फिर इन दिग्गजों को अपने आलाकमान के सामने भी यह तो यह दिखाना है कि उनके समर्थन से कितने प्रमुख चुनकर आए हैं। चुनाव नतीजे से ही उनका सियासी कद भी तय होना है।
सपा ने लगाया एड़ी-चोटी का जोरजिला पंचायत सदस्य और फिर अध्यक्ष के चुनाव में मात खाई सपा इस चुनाव में अपना बर्चस्व साबित करने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा रही है। सपाई दिग्गजों ने अपने नेतृत्व से वादा भी कर दिया है कि वह ज्यादातर ब्लॉकों में अपने प्रमुखों जिताने में जरूर कामयाब रहेंगे, लेकिन यहां भी सपा खेमे को बसपा के प्रमुख पद के दावेदारों से कड़ी चुनौती मिल रही है। रालोद और भाजपा तो इस लड़ाई में पीछे छूटती दिख रही हैं।