दाऊजी मंदिर की प्राचीन पर दिखाई दे रहे दागे गए गोलों के छेद। संवाद
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मेले से पहले दाऊजी मंदिर पर अंग्रेजों की तोप के गोलों से जुड़ी वर्षों पुरानी कहानी पर नया सवाल खड़ा हुआ है। नए शोध में दावा किया गया है कि गोले 15 किमी दूर सासनी से नहीं, बल्कि महज 1.25 किमी दूर सासनी गेट से दागे गए थे। दिशा, दूरी और भौगोलिक गणनाओं के आधार पर सामने आए इस दावे ने इतिहासप्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
माना जाता रहा है कि गोले करीब 15 किमी दूर सासनी के किले से दागे गए थे। श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान के संस्थापक एवं खगोलविद आचार्य विनोद शास्त्री ने खगोलीय यंत्रों और भौगोलिक गणनाओं के आधार पर इस धारणा को गलत बताते हुए हमला हाथरस के सासनी गेट से किए जाने का दावा किया है।
विनोद शास्त्री के अनुसार मंदिर के शिखर पर गोलों के निशान जिस दिशा में हैं, वह सासनी गेट की ओर पड़ती है। किला मंदिर से सासनी गेट की दूरी करीब 1.25 किमी है, जबकि सासनी कस्बा करीब 15 किमी दूर है। उनके अनुसार मंदिर को केंद्र मानकर सासनी की दिशा करीब 81 डिग्री के कोण पर उत्तर की ओर पड़ती है, जो गोलों के निशानों की दिशा से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि उस दौर की तोपों से इतनी दूर से सटीक निशाना साधना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। उनका दावा है कि स्थानीय बोलचाल में सासनी गेट के उल्लेख को समय के साथ सासनी के किले से जोड़ दिया गया, जिससे यह धारणा बनी।
दिशा ने खोला रहस्य
मंदिर के शिखर पर गोलों के निशान पश्चिम दिशा की ओर बताए गए हैं। शोधकर्ता के अनुसार यह दिशा सासनी गेट से मेल खाती है, जबकि सासनी कस्बे की स्थिति उत्तर की ओर तिरछी पड़ती है।
दूरी पर भी उठे सवाल
किला मंदिर से सासनी गेट की दूरी करीब 1.25 किमी बताई गई है। शोध में आधुनिक युद्धक टैंकों की प्रभावी मारक क्षमता से तुलना करते हुए 15 किमी दूर से ब्रिटिशकालीन तोप से सटीक निशाना साधने के दावे पर सवाल उठाया गया है।