गांव सीस्ता में शनिवार को संविलियन विद्यालय के पुराने भवन को संबंधित विभाग को बिना सूचना दिए और बिना अनुमति के तुड़वाए जाने का मामला सामने आया है। स्कूल के शिक्षकों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद मौके पर क्षेत्रीय लेखपाल ने पहुुंचकर कार्य रुकवा दिया और पूरी मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और एसडीएम से की गई शिकायत में बताया कि संविलियन विद्यालय सीस्ता का पुराना भवन जर्जर स्थिति में गांव के मध्य में स्थित है। विद्यालय वर्तमान में गांव से बाहर बने नवीन भवन में कक्षा एक से आठ तक संविलियन विद्यालय के रूप में संचालित हो रहा है।
पुराने जर्जर भवन की नीलामी नियमानुसार तीन बार कराई गई, लेकिन निर्धारित धनराशि पर किसी भी बोलीदाता द्वारा बोली नहीं लगाई गई। ऐसे में शासनादेश के मुताबिक जर्जर भवन को ग्राम पंचायत द्वारा ध्वस्त कर प्राप्त मलबे का प्रयोग विद्यालय में ही आवश्यकता अनुसार निर्माण कार्य में किया जाना है।
यही नहीं विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा मलबे से विद्यालय में किचिन शेड बनवाने एवं पुराने जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण के बाद जमीन का प्रयोग विद्यालय के खेल मैदान के लिए करने का प्रस्ताव किया गया। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने समिति के इस प्रस्ताव का विद्यालय में आकर विरोध किया और विद्यालय के जर्जर भवन का ध्वस्तीकरण नहीं करने दिया गया।
विभागीय अधिकारियों द्वारा समझाने के बाद भी जर्जर भवन को ध्वस्त नहीं कराया गया। शनिवार को सुबह करीब साढ़े नौ बजे विद्यालय के बच्चों ने सूचना दी कि विद्यालय के पुराने जर्जर भवन को तोड़ा जा रहा है, जबकि भवन को ध्वस्त करने के संबंध में कोई भी सूचना विभाग अथवा विद्यालय को नहीं दी गई थी। आरोप है कि मौके पर लेबर ने बताया कि प्रधान प्रतिनिधि द्वारा इसे अपना पुराना घर बताकर तोड़ने के लिए कहा गया है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि यह पूर्णतः नियम विरुद्ध है।
प्रथमदृष्टया शिकायत के आधार पर लेखपाल को भेजकर मामले की जांच कराई गई थी। फिलहाल भवन को तुड़वाए जाने के कार्य को रुकवा दिया गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
-मनीष चौधरी, एसडीएम।