जिला अस्पताल में सीटी (कंप्यूटेड टॉमोग्राफी) स्कैन की सुविधा का दुरुपयोग हो रहा है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के लोग सीटी स्कैन कराते हैं, जब चिकित्सक मना करते हैं तो फिर जुगाड़ लगाई जाती है। किसी भी दर्द या आंतरिक दिक्कत की स्थिति में मरीज खुद या फिर अप्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह पर स्कैन कराने का दबाव बनाते हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना हो रहे 40 सीटी स्कैन में से एक तिहाई जबरन वाले होते हैं, जिनमें दलालों की भी भूमिका रहती है। परेशान जिला अस्पताल प्रबंधन ने अब एडवाइजरी जारी की है कि बार इस खतरनाक रेडिएशन के संपर्क में आने से कैंसर भी हो सकता है।
एक्स-रे से 10 गुना ज्यादा रेडिएशन
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में तो ठीक है, लेकिन अकारण स्कैन दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का कारण बनता है। एक्स-रे की तुलना में सीटी स्कैन से तीन से 10 गुना तक हानिकारक रेडिएशन निकलते हैं। बार-बार संपर्क में आने से मानव ऊतकों की संरचना बदल जाती है, जिससे कैंसर व अन्य बीमारियों का खतरा होता है।
रोजाना हो रहे 40 सीटी स्कैन
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 110 एक्स-रे व 40 सीटी स्कैन होते हैं। सीटी स्कैन की मशीन प्राइवेट कंपनी के जरिये लगी हुई है, जिस पर अस्पताल रोजाना 50 से 60 हजार रुपये का व्यय करता है। इन 40 में से एक तिहाई सीटी स्कैन जुगाड़ वाले होते हैं। रोजाना एक दर्जन से अधिक मरीज केवल सीटी स्कैन के लिए ओपीडी में पहुंचते हैं, जो कि चिकित्सकों समझाने पर भी नहीं मानते। यही स्थिति एक्स-रे की भी है। फिजिशियन डाॅ. वरुण चौधरी ने बताया कि सर्दी से सिर दर्द व छाती संक्रमण के मरीज आते ही पहले सीटी स्कैन के लिए दबाव बनाते हैं। इन्हें समझाना मुश्किल होता है।
रेडिएशन से इन बीमारियों का खतरा
बढ़ते दबाव के चलते सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश को सीटी स्कैन के दुष्प्रभावों के संबंध में एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है। इसके लिए अस्पताल में वॉल पेंटिंग कराई गई है। चिकित्सकों के कक्ष में भी एडवाइजरी लगाई गई है। सीएमएस ने बताया कि बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आने से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है, जिससे कैंसर, फेफड़ों का कमजोर होना, हड्डियों में टेड़ापन व कमजोर होना, गर्भधारण में समस्या, गुर्दों के खराब होने का जोखिम, मस्तिष्क में कमी, जन्म लेने वाले बच्चों में दिव्यांगता आदि समस्या हो सकती है।
इनका कहना है
अकारण लोग सीटी स्कैन कराना चाहते हैं, जबकि यहां के चिकित्सक का परामर्श नहीं होता। बाहर छोटी से छोटी समस्या के लिए भी सीटी स्कैन कराने का परामर्श दे दिया जाता है। समझाने पर भी लोग नहीं मानते, जिसके लिए एडवाइजरी करनी पड़ी है। प्राकृतिक स्रोतों से एक साल में मानव शरीर पर दो एमएसवी का प्रभाव पड़ता है, जबकि एक बार का सीटी स्कैन इससे कई गुना अधिक प्रभाव छोड़ता है। जिला अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर ही स्कैन किया जाता है। अस्पताल में भटकने वाले अवांछनीय तत्वों पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे मरीजों को समस्या न हो।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
प्रकार एक्स-रे रेडिएशन
सीटी रेडिएशन
छाती : 0.1 एमएसवी 6.1 एमएसवी
दंत : 0.005 एमएसवी ०.18 एमएसवी
पेट : 0.7 एमएसवी 15.5 एमएसवी
रीढ़ : 1.5 एमएसवी 8.8 एमएसवी
नोट: मानव शरीर पर रेडियोएक्टिव रेडिएशन का प्रभाव मिलीसीवर्ट यानी एमएसवी में नापा जाता है।