सीएमओ कार्यालय की वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को एंटी करप्शन की टीम यहां छानबीन के लिए पहुंची। जिस कार्यालय से लिपिक की गिरफ्तारी की गई थी, उसका ताला खुलवाया गया और विवेचना की औपचारिकताएं पूर्ण कीं।
पुलिस की प्रारंभिक छानबीन में कई कर्मचारियों के नाम आए हैं, जो क्लाइंट महिला लिपिक तक पहुंचाते थे। पुलिस अब इनके खिलाफ सबूत ढूंढ़ रही है। कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही हैं।
प्रशिक्षु प्रशांत परमान निवासी सिकंदराराऊ की शिकायत पर दो फरवरी को एंटी करप्शन अलीगढ़ की टीम ने महिला लिपिक बबिता चौहान को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। प्रशांत ने बी-फार्मा किया था और तीन माह के प्रशिक्षण के लिए उन्होंने सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। आरोप था कि लिपिक ने सीएचसी अलॉट करने के नाम पर सात हजार रुपये की मांग की थी।
गुजारिश के बाद रकम घटाकर पांच हजार रुपये कर दी थी। परेशान प्रशिक्षु ने फिर एंटी करप्शन में शिकायत की, जिसके बाद ट्रैप टीम ने जाल बिछाया। इस कार्रवाई से सीएमओ कार्यालय में खलबली मच गई थी। सोमवार को एक बार फिर टीम आने की जानकारी पर कार्यालय में खलबली मच गई। कई कर्मचारी अपने कार्यालय से खिसक लिए।
टीम ने कार्रवाई के बाद से बंद कार्यालय को खुलवाया और विवेचना की कार्रवाई पूर्ण की। कार्यालय में कई लोगों से पूछताछ भी की गई। एंटी करप्शन प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि टीम विवेचना की कार्रवाई पूर्ण करने पहुंची थी। महिला से हुई पूछताछ के बाद कई कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इस संबंध में जांच की जा रही है। पुख्ता सबूत के आधार पर मामले में नाम बढ़ाए जा सकते हैं।