नगर पालिका के टेंडरों में फर्जी एफडीआर लगाकर ठेके हासिल करने के मामले में प्रशासनिक जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद नगर पालिका ने संबंधित फर्मों पर सख्ती नहीं दिखाई। इस मामले में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में संबंधित फर्मों के नाम शामिल नहीं किए गए, जबकि इनमें कई फर्म अन्य जगहों पर भी काम कर रही हैं।
मार्च 2025 में नगर पालिका के टेंडरों में करीब 41 फर्जी एफडीआर लगाए जाने का मामला सामने आया था। आरोप था कि करीब पांच करोड़ रुपये के टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी एफडीआर का इस्तेमाल किया गया। मामला उजागर होने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने जांच कराई और कोतवाली हाथरस गेट में प्राथमिकी भी दर्ज कराई, लेकिन इसमें फर्जी एफडीआर लगाने वाली फर्मों के नाम शामिल नहीं किए गए और न ही ये फर्म ब्लैकलिस्ट हुईं। कार्रवाई केवल जेई हर्षवर्धन तक सीमित रही थी। उस दौरान निलंबित करने के कुछ महीने बाद उन्हें भी बहाल कर दिया गया था।
एडीएम ने लिया चार्ज, लंबित निविदाओं की जानकारी की
नगर पालिका का कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद एडीएम प्रशांत तिवारी ने शुक्रवार शाम को नगर पालिका परिषद हाथरस पहुंचकर चार्ज ग्रहण किया। इस दौरान ईओ रोहित सिंह ने लंबित निविदाओं व विकास कार्यों की जानकारी की। शहर में जलभराव की समस्या दूर कराने को लेकर भी एडीएम ने ईओ को निर्देशित किया। शनिवार को विकास कार्यों को लेकर विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर ही एफआईआर दर्ज कराई गई थी। विस्तृत जांच रिपोर्ट फर्मों के नाम सहित शासन में भेजी गई थी। शासन के निर्देशों के क्रम में कार्रवाई की जाएगी। इधर एफआईआर की जांच भी पुलिस स्तर से चल रही है, जिनमें फर्मों को भी शामिल किया जा रहा है। पुलिस की जांच में यदि फर्म दोषी मिलती हैं तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस