अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग ने बताया कि पहली शिकायत जिस छात्रा के नाम से की गई, उसे बुलाया गया। वह अपने माता पिता के साथ कॉलेज आई और लिखित बयान दिया कि उसने कोई शिकायत नहीं की है। डीएम को संबोधित एक शपथ पत्र दिया। इसके बाद कॉलेज की जांच समिति ने यह मान लिया था कि डॉ. रजनीश और युवती को बदनाम करने के लिए यह शिकायत की गई है। शिकायत हाथरस के मुख्य डाकघर से पोस्ट की गई थी। वहां से भी शिकायत कर्ता की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मांगी गई। लेकिन पोस्टमार्टम ने सीसीटीवी कैमरे खराब होने की बात कही। यदि यह फुटेज मिल जाती तो तभी स्थिति साफ हो जाती।
केवल कक्षाओं में लगे थे सीसीटीवी कैमरे
प्रबंध समिति का कहना है कि कॉलेज में केवल कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगे है, भूगोल ही नहीं बल्कि किसी भी विभाग के कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे। इसलिए यह आरोप निराधार है कि भूगोल विभाग के कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे।अब सभी 15 विभागों कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
अप्रत्यक्ष रूप से गुटबाजी की स्वीकारी बात
प्रबंध समिति के अध्यक्ष का कहना है कि कालेज में प्रत्यक्ष रूप से गुटबाजी नहीं है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अंदरखाने गुटबाजी हो सकती है, इससे हम इंकार नहीं कर सकते। डा. रजनीश को बर्खास्त करने की बात पर कहा कि प्रबंध समिति के पास इसका अधिकार है, वह डा. रजनीश को बर्खास्त कर सकती है। इसे लेकर कार्रवाई चल रही है।