तापमान गिरने के साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चे कोल्ड डायरिया के शिकार हो रहे हैं। जिले में पिछले चार दिनों में चार बच्चों की मौत हो गई है। जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को बुखार, उल्टी और दस्त के शिकार 132 बच्चे जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक अभिभावकों को सर्दी से बचाव व साफ-सफाई की सलाह दे रहे हैं।
चिकित्सकों की माने तो सर्दी के मौसम में नोरोवायरस के अलावा ठंड में राइनोवायरस, इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू वायरस व रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस भी पनपते हैं। ये तीनों वायरस सर्दी-जुकाम व सांस संक्रमण की समस्या पैदा करते हैं।
इनसे खांसी, छाती में जकडऩ, बलगम आदि की समस्या होती है। ये सभी वायरस मिलकर कोल्ड डायरिया की स्थिति पैदा करते हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि इस मौसम में छोटे बच्चों का खास ध्यान रखने की आवश्यकता है। सर्दी-जुकाम के कारक वायरस ठंड में काफी समय तक हवा में बने रहते हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले बच्चे का संपूर्ण टीकाकरण होना चाहिए।
नोरोवायरस से बचाव के लिए आस-पास गंदगी न होने दें। बच्चों को दूषित पानी व दूषित भोजन से बचाएं। यदि बच्चा फार्मूला दूध या बोतल से दूध पिता है तो बोतल को हर बार उबालें।
जिला अस्पताल में पहुंचे 1433 मरीज : सर्दी व बुखार से प्रभावित मरीजों की संख्या में कम नहीं हो रही। जिला अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। खासकर बाल रोग विशेषज्ञों के यहां बच्चों की लाइन लगी हुई है। एक-एक दिन में एक चिकित्सक दो सौ से ढाई मरीज देख रहे हैं।
जिला अस्पताल में शुक्रवार को 1433 पर्चे बनाए गए। यहां फिजीशियन व बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष पर ही लोगों की भीड़ जुटी रही। 132 बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण किया। इनमें अधिकतर सर्दी-जुखाम से पीडि़त थे। एक साल से कम के आठ बच्चे ऐसे आए, जिन्हें सर्दी व दस्त की शिकायत थी।