छीतूपुर झील में प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो गई है, जिससे हसायन ब्लॉक का यह क्षेत्र एक बार फिर प्राकृतिक सौंदर्य से गुलजार होने लगा है। इस मनमोहक नजारे को निहारने के लिए ग्रामीणों के साथ पक्षी प्रेमियों की भी आवाजाही शुरू हो गई है।
हसायन ब्लॉक के गांव छीतूपुर की झील इन दिनों विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार है। जानकारों का मानना है कि इस सीजन में करीब 150 प्रजातियों के 20 हजार से अधिक पक्षी यहां पहुंच सकते हैं। यह झील उत्तर भारत के प्रमुख वेटलैंड क्षेत्रों में गिनी जाती है, जहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पक्षी सर्दियां बिताने आते हैं।
करीब 400 साल पुरानी इस ऐतिहासिक झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 360 बीघा बताया जाता है। हालांकि वर्तमान समय में करीब 260 बीघा क्षेत्र में ही पानी उपलब्ध है, फिर भी यह क्षेत्र पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। झील में भरपूर जल, मछलियां और प्राकृतिक वनस्पति होने के कारण यह प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बन चुकी है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा चीन, श्रीलंका, रूस, भूटान समेत कई अन्य देशों से भी पक्षी आते हैं।
सामान्य रूप से निवास करने वाले देसी पक्षी
इस वेटलैंड क्षेत्र में साल भर देसी प्रजातियों के अनेक पक्षी देखने को मिलते हैं। इनमें ओपनबिल्ड स्टार्क, व्हाइट आइविस, डार्टर, कार्मोरेंट, सारस क्रेन, पेंटेड स्टार्क, व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर, पाइड किंगफिशर, बी-ईटर, ड्रोंगो, पनडुब्बी, पनकौवा, जलकौवा, कठफोड़वा, मोर, पैराकीट्स, जंगल फाउल, पार्टि्रज, तीतर, कौव्वा, कोयल, मैना, वैया, कबूतर, गौरैया, बतख, बाज, उल्लू, नीलकंठ सहित कई अन्य प्रजातियां शामिल हैं। ये पक्षी झील के आसपास के वातावरण को जीवंत बनाए रखते हैं।
इन प्रवासी पक्षियों के आने की है उम्मीद
सर्दी के मौसम में प्रवासी प्रजातियों के पक्षी बड़ी संख्या में छीतूपुर झील का रुख करते हैं। इनमें गीज, टील, क्रीट, पिंटेल, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, शॉवलर, विजन, ब्राह्मणी डक, कॉमन टील्स, राजहंस, फोनिकोप्टेरस माइनर, स्टार्क्स आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा साइबेरियन, कनवेरियन, अब्बासियान, ऑस्ट्रेलियन और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के खूबसूरत पक्षी भी यहां देखे जाते हैं। ये पक्षी सर्दियों के अंत तक यहां प्रवास करते हैं और गर्मी शुरू होते ही अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं।
पक्षियों की सुरक्षा का खाका तैयार
वन विभाग की ओर से प्रवासी और देसी पक्षियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। झील क्षेत्र में 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि शिकारियों पर नजर रखी जा सके और पक्षियों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह झील जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और इसके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
छीतूपुर झील में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। इस समय आसमान में भी काफी अच्छे नजारे देखने को मिल रहे हैं। दिन के समय साफ तौर पर पक्षियों का जमघट देखा जा सकता है। पक्षियों की शिकारियों से सुरक्षा के लिए भी कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
-दिलीप कुमार, क्षेत्रीय वनाधिकारी सिकंदराराऊ।