बिना डिग्री के अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और अस्पताल चला रहे झोलाछापों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी कर ली गई है। गलत उपचार के कारण मरीजों की जान जाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हाल ही में सासनी क्षेत्र में हुई घटना के बाद विभाग हरकत में आ गया है। अब झोलाछाप डॉक्टरों को खोजने और उन पर कार्रवाई करने की सीधी जिम्मेदारी सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को सौंपी गई है।
बीती आठ मई को सासनी के एक अस्पताल में मेंडू की गर्भवती महिला व गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। केवल बीएएमएस की डिग्री पर ही यह अस्पताल चलाया जा रहा था। सिकंदराराऊ में भी ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए अब सीएचसी प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत अब जिले के हर सीएचसी प्रभारी (एमओआईसी) को अपने-अपने ब्लॉक और अधिकार क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे होगी कार्रवाई
चिह्नित होंगे अवैध क्लीनिक : एमओआईसी अपने क्षेत्रों में चल रहे उन सभी क्लीनिकों, पैथोलॉजी और नर्सिंग होम का सर्वे करेंगे, जो बिना वैध पंजीकरण और डिग्री के संचालित हो रहे हैं।
होगी सख्त कार्रवाई : जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति बिना मेडिकल डिग्री या स्वास्थ्य विभाग के पंजीकरण के बिना एलोपैथिक दवाएं देते या इलाज करते पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। क्लीनिक सील किया जाएगा।
नियमित रिपोर्टिंग : सभी प्रभारियों को अपने क्षेत्र में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जिला मुख्यालय को नियमित रूप से सौंपनी होगी।
आम लोगों के जीवन से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए यह जिम्मेदारी तय की जा रही है। इससे अवैध चिकित्सा व्यवसाय पर लगाम लगाई जा सकेगी। मुख्यालय से एमओआईसी द्वारा की जा रही कार्रवाई की मॉनिटरिंग की जाएगी।
डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ।