दिल्ली में ग्रीन टैक्स में बढ़ोतरी के विरोध में चल रही ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर अब हाथरस के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दिल्ली और एनसीआर से माल का आवागमन प्रभावित होने से जिले के थोक और फुटकर कारोबारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। हाथरस से भेजा जाने वाला माल गोदामों में अटक गया है। दिल्ली से आने वाली जरूरी वस्तुओं की सप्लाई भी बाधित हो गई है।
पेट्रोल-डीजल के दामों मेें इजाफे के बीच दिल्ली में अचानक डीजल वाहनों से लिए जाने वाला ग्रीन टैक्स 17 सौ रुपये से सीधे 23 सौ रुपये बढ़ाए जाने से ट्रांसपोर्टर खासे परेशान हैं। हाथरस से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रेडीमेड गारमेंट्स, मेटल हैंडीक्राफ्ट, हींग, अचार और मुरब्बा जैसे उत्पाद दिल्ली और एनसीआर के बाजारों में भेजे जाते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण इन उत्पादों की ढुलाई ठप हो गई है, जिससे कारोबारी आर्थिक नुकसान की आशंका जता रहे हैं।
दूसरी ओर दिल्ली से आने वाले सौंदर्य प्रसाधन, लोहे का सामान, इलेक्ट्रिक गुड्स और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की सप्लाई रुकने से हाथरस के फुटकर व्यापारी भी परेशान हैं। दुकानदारों का कहना है कि यदि माल की आवक जल्द शुरू नहीं हुई, तो बाजार में कई वस्तुओं की कमी हो जाएगी। व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की नजर अब सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है। सभी को उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलेगा और दिल्ली-एनसीआर के साथ माल आवागमन फिर सामान्य हो सकेगा।
पिछले दो दिनों से दिल्ली रूट पर अधिकांश गाड़ियां खड़ी हैं। माल तैयार है, लेकिन परिवहन न होने के कारण उसे भेजा नहीं जा पा रहा। यदि हड़ताल लंबी चली, तो व्यापारियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्टरों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
-अमित बंसल, ट्रांसपोर्टर।
दिल्ली में ग्रीन टैक्स में अत्यधिक वृद्धि के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने यह कदम उठाया है। इसका असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों के व्यापार पर भी पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच जल्द समाधान निकलेगा।
-नवजोत शर्मा, ट्रांसपोर्टर।
दिल्ली और नोएडा के बाजारों में गर्मी के सीजन के लिए भेजा जाने वाला माल तैयार पड़ा है, लेकिन समय पर डिलीवरी न होने से ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो भुगतान और नए ऑर्डर दोनों पर असर पड़ेगा।
-सुरेंद्र वार्ष्णेय, रेडीमेड कपड़ों के निर्माता।
हाथरस के उत्पादों की बड़ी मांग एनसीआर क्षेत्र में रहती है। माल रुके रहने से न केवल पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है, बल्कि कारीगरों के भुगतान में भी दिक्कत आने लगी है। कई छोटे कारोबारी पहले ही सीमित संसाधनों पर काम कर रहे हैं, ऐसे में यह व्यवधान चिंता बढ़ाने वाला है।
-सौरभ वर्मा, मेटल हैंडीक्राफ्ट कारोबारी।