रतलाम सियासत की ओर से अंग्रेजी शासनकाल में जारी किया गया तांबे का सिक्का। स्रोत : स्वयं
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बृहस्पतिवार को हनुमान जयंती मनाई जा रही है, भक्त उनकी आराधना में लीन हैं। उनके प्रति आस्था और इतिहास से जुड़ा एक रोचक तथ्य भी सामने आया है। एक समय की हनुमानजी की महिमा का प्रभाव इतना व्यापक था कि ब्रितानी हुकूमत को भी उनके चित्र वाले सिक्के को चलन में रहने की अनुमति तक देनी पड़ी थी।
उस समय तलाम रियासत के राजा रंजीत सिंह जो स्वयं हनुमान भक्त थे, उन्होंने एक पैसे के तांबे के सिक्के जारी किए थे, जिन पर भगवान हनुमान की आकृति अंकित थी। इसमें वह एक हाथ में गदा लिए हुए दर्शाए गए हैं।
उस समय इन सिक्कों को चलन में लाने के लिए अंग्रेजी शासकों की अनुमति आवश्यक थी, जिसे उन्होंने प्रदान किया। यह उस समय हनुमानजी की व्यापक लोकप्रियता और आस्था का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान चारों युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में पूजनीय माने जाते हैं। उन्हें संकटमोचक और रामभक्त के रूप में जाना जाता है।
हाथरस के संग्रहकर्ता के पास सुरक्षित धरोहर
शहर के सिक्का संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सराफ के पास यह दुर्लभ सिक्का आज भी सुरक्षित है। उनका कहना है कि यह सिक्का न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है। शैलेन्द्र कहते हैं कि आस्था और इतिहास का संगम है, यह सिक्का इस बात का प्रमाण है कि हनुमानजी की महिमा केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में भी उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।