हाथरस पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य आईवीएफ सेंटर से नाउम्मीद होने वाले दंपतियों को अपना निशाना बनाते थे और मुंह मांगे दामों पर उन्हें फर्जी गोदनामे के आधार पर बच्चा बेच देते हैं। इस गिरोह में शामिल महिलाएं व पुरुष दिल्ली व अन्य प्रांतों में संचालित आईवीएफ सेंटरों में भी काम कर चुके हैं। गिरोह के कुछ सदस्य अब भी वहां काम कर रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी है। गिरोह के सदस्य उपचार के बाद भी मां-बाप न बनने वाले दंपतियों से संपर्क साधते थे और पैसे वाले लोग और संपन्न परिवार आसानी से इनके चंगुल में फंस जाते थे।
पुलिस के अनुसार बच्चे की उम्र-सुंदरता के आधार पर रेट तय किए जाते हैं। नवजात बच्चे के अधिक रेट मिलते थे। इन दंपतियों की बेटा या बेटी मिलने की डिमांड के बारे में जानकारी ली जाती है। लड़का छह लाख रुपये में और लड़की के लिए दो से तीन लाख सौदा तय हो जाता था। पुलिस को कुछ आईवीएफ सेंटर में काम करने वाली महिलाओं के इस गिरोह से जुड़े होने की जानकारी मिली है। इनकी भी तलाश की जा रही है।
छह साल पहले रेलवे स्टेशन से अगवा हुई थी बच्ची
करीब छह साल पहले एक बच्ची का अपहरण रेलवे स्टेशन से हुआ था। जिसे पुलिस अब तक नहीं तलाश पाई है। दिव्यांग मालती पत्नी झम्मन लाल निवासी नया बांस, सुरीर, मथुरा अपनी तीन बेटियों और एक बेटे को लेकर पति के साथ दिल्ली के शाहदरा थाना क्षेत्र के मीत नगर में रहती है। पति ई-रिक्शा चलाकर परिवार को पालन-पोषण करता है। रक्षाबंधन पर मालती गंगीरी निवासी अपने भाई को राखी बांधने के आई थी। स्टेशन पर वापसी के दाैरान एक महिला उसकी एक साल की बेटी लक्ष्मी को खिलाने के बहाने लेकर गायब हो गई। पुलिस इस घटना में अब तक अपहर्त बच्ची को तलाश नहीं सकी है।