फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तापमान बढ़ने से गेहूं, जौ और दलहन की फसल पर खतरा

Sun, 26 Feb 2017 11:14 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन
wheat
विज्ञापन
तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने किसानों की चिंता बढ़ा रखी हैं। खासकर गेहूं, जौ और दलहन की फसल के लिए तापमान में हुई यह वृद्धि घातक साबित हो सकती है। तापमान बढ़ने से यह फसलें वक्त से पहले पक जाएंगी और उन्हें वृद्धि के लिए बेहतर माहौल नहीं मिल सकेगा।
विज्ञापन


इसका सीधा असर इनकी पैदावार पर पड़ेगा। इन फसलों की पैदावार में भी गिरावट आ सकती है। दलहन की पैदावार भी तापमान के प्रकोप से प्रभावित होगी। किसानों ने अपनी फसल को तापमान के विपरीत असर से बचाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। 

पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में एकाएक चौंकाने वाली वृद्धि हुई है। दिन में इस कदर गर्मी का अहसास हो रहा है कि गर्म कपड़े एक पल के लिए भी पहनना मुश्किल हो जाता है। तापमान में हुई इस बढ़ोतरी से इंसानों के साथ वनस्पति भी भला कैसे बच सकती है।
विज्ञापन


अभी से ही फसलों पर तापमान में वृद्धि का असर दिखने लगा है। खासकर गेहूं, जौ, सरसों और दलहनी फसलें बोने वाले किसान मौसम के नए रुख से चिंता में हैं। तापमान बढ़ने से उन्हें अपनी फसलों पर खतरा नजर आ रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. श्याम सिंह की मानें तो तापमान बढ़ने का सबसे ज्यादा असर गेहूं पर पड़ेगा। गेहूं में इस समय दाना बनने की अवस्था चल रही है, जोकि तापमान बढ़ने से प्रभावित होगी। 

फसल समय से पहले पक जाएगी और दाने की वृद्धि सीमित रह जाएगी, जिससे दाने का वजन कम हो जाएगा। गेहूं में पानी की मांग भी बढ़ेगी। अगर पानी दिया जाएगा तो तनों के गिरने का खतरा भी बढ़ेगा। इसी तरह मसूर की फसल में भी इस समय दाना बनने की अवस्था चल रही है। 

तापमान बढ़ने से इसके फूल के क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहेगा। जौ की फसल में भी गर्मी की मार से दाना सूख जाएगा या फिर पतला रह जाएगा, इसलिए कम से कम 15-20 दिन तक मौसम ठंडा रहने की जरूरत है, ताकि इन फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके। 

आलू किसान की मुश्किल हुई आसान 
आलू खुदाई में लगे किसानों की मुश्किल तापमान बढ़ने से आसान हो गई है। गर्मी से आलू की मिट्टी खुस्क और भुरभुरी हो गई है, जिससे आलू बेहद आसानी से खुद रहा है और किसानों को इसकी सफाई में भी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही, जिससे किसानों का समय और लेबर दोनों की बचत हो रही है।

गेहूं, जौ और दलहन की फसलों के लिए अभी नमी की जरूरत कम से कम 20 दिन तक और है। अगर इस दौरान मौसम ठंडा रहता है और ओस पड़ती है तो फसलों को वृद्धि का मौका मिल जाएगा, वरना तापमान बढ़ने से उत्पादन में गिरावट तय है।
विज्ञापन

- डॉ. श्याम सिंह, कृषि वैज्ञानिक 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें