क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका बीमारी से पशुओं के मरने की खबर से पशुपालन विभाग की टीमें आठ गांवों में पहुंचीं और पशुओं की जांच की। पशुपालकों के बचाव के उपाय भी बताए। साथ ही क्षेत्र में 22 जनवरी टीकाकरण शुरू करने की बात भी कही है।
गांव जिरौली के ग्रामीण रविवार को पूर्व विधायक यशपाल सिंह से मिले थे। ग्रामीणों ने उन्हें बताया था कि उनके व आसपास के गांवों में सौ से ज्यादा पशुओं की खुरपका और मुंहपका से मौत हो चुकी है। यशपाल सिंह ने डीएम को इस मामले से अवगत कराया था। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित हुई।
सोमवार सुबह डीएम अतुल वत्स के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग की टीमों ने पोरा, जिरौली, सिंधौली, गढि़या, इकबालपुर, पचौं, देवीनगर, महामई सलावतनगर गांवों में पहुंचीं और पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।
ग्रामीणों का कहना है कि छह माह पूर्व पशुओं को खुरपका और मुंहपका से बचाव के टीके लगाए गए थे। इसके बाद नवंबर माह से यह बीमारी फैलनी शुरू हो गई।इस बीमारी से पीड़ित पशुओं के पैरों में सूजन और मुंह में छाले हो जाते हैं। पशुओं को चारा खाने में दिक्कत होती है और मुंह से खून गिरने लगता है।
इस दौरान क्षेत्र के गांव सिधौली में रवि, पप्पू और वासुदेव की गाय, गांव गढि़या में महेश की भैंस, राजपाल का बैल और वीरेंद्र उर्फ भुल्ला की दो भैंस इस बीमारी से मर चुकी हैं।
गांव सराय में खूबलाल, विनोद, महीपाल, नाथू फौजी और भगवान सिंह की 12 से ज्यादा भैंसें इस बीमारी से ग्रसित हैं। गांव महामई सलावत नगर की गोशाला में भी कई गोवंश बीमारी के कारण लंगड़ाकर चल रहे हैं।
पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ.केसी लोधी ने बताया कि जिला पशुधन प्रसार अधिकारी विजय सिंह के साथ वह गांवों का दौरा कर रहे हैं। 22 जनवरी से पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। कुछ झोलाछाप चिकित्सक पशुओं का गलत इलाज कर रहे हैं, जिनके बारे में जानकारी की जा रही है।
अंधविश्वास..पशुओं को बचाने के लिए ग्रामीण निकाल रहे खप्पर
पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए गांवों में अंधविश्वास का भी सहारा लिया जा रहा है। गांव जिरौली में ग्रामीणों गांव में खप्पर निकाला और पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए पूजा की। सादाबाद में कई गांवों में खप्पर निकाला जा रहा है।
क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों दुधारू पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी फैल रही है। पशुपालकों का कहना है कि वर्तमान समय में एक दुधारू भैंस की कीमत एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच गई है। ऐसे में इस बीमारी के कारण पशुओं की मौत होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सादाबाद क्षेत्र के गांव एदलपुर, विधिपुर, टीकैत, गढ़, वनगढ़, तिल्हू सहित अन्य कई गांवों में खुरपका-मुंहपका बीमारी फैल चुकी है। कई गांवों में बीमारी की रोकथाम के लिए ग्रामीण एहतियातन खप्पर भी निकाल चुके हैं।
विभाग के उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्रजीत सिंह ने बताया कि 22 जनवरी से टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा और यह लगातार 45 दिन तक चलेगा। शीघ्र जिले को वैक्सीन प्राप्त हो जाएगी।
- खुरपका मुंहपका से उनकी भैंस कई दिन से पीड़ित है। लगातार उपचार कराए जाने के बाद भी लाभ नहीं हो रहा है। अशोक कुमार, टीकैत
ग्रामीण इलाकों में लगातार टीमों को भेजा जा रहा है। अभी तक किसी भी गांव में पशुओं की मौत की जानकारी नहीं मिल रही है। न ही कोई संक्रामक रोग फैला हुआ है। गांव सिंधौली में 30 दिसंबर को एक भैंस की मौत हुई थी। पशुपालक से वार्ता की गई।
विजय सिंह यादव, सीवीओ।