नगर पालिका परिषद और मंडी समिति के बीच गृह व जलकर के भुगतान को लेकर ठन गई है। 1.49 करोड़ रुपये के बकाया टैक्स के लिए दोनों विभाग आमने-सामने हैं। टैक्स की रकम जमा न होने का असर नगर पालिका के विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। मंडी समिति ने अब इस बकाया राशि का भार अपने आवंटियों पर डालने की तैयारी कर ली है।
कृषि उत्पादन मंडी समिति को परिसीमन के बाद नगर पालिका क्षेत्र में शामिल हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन नगर पालिका ने केवल दो साल के ही गृह व जलकर का आंकलन किया है। नियमानुसार केवल आवासों को पांच साल तक की छूट होती है, सरकारी कार्यालयों को नहीं। नगर पालिका के अनुसार वर्ष 2024-25 तथा 2025-2026 का मंडी पर कुल 1.49 करोड़ रुपये का बकाया है।
नगर पालिका के आंकलन के सापेक्ष मंडी प्रशासन ने पिछले वर्ष मार्च में टैक्स के रूप में 18 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसमें मंडी ने केवल 11 भवन चयनित किए थे, जिनमें कार्यालय भवन, चेक पोस्ट, गोदाम, मंडी की खाली भूमि, किसान विश्राम गृह, ओवरहेड टैंक, नलकूप, वे-ब्रिज व पांच दुकानें शामिल हैं। मंडी ने केवल इन्हीं भवनों का मांग बिल भेजने का अनुरोध किया है।
व्यापारियों व आढ़तियों से करें वसूली
मंडी में आवटित दुकान, गोदाम व आवास के लिए मंडी प्रशासन ने सीधे आवंटियों से वसूली करने के लिए कहा है। इस संबंध में 17 नवंबर को नगर पालिका को पत्र भी जारी कर दिया था। बता दें कि मंडी की चार एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश राज्य भंडार निगम को 90 वर्ष के पट्टे पर दे दी गई है। इसके अलावा लगभग 292 दुकानें व 28 आवास आवंटित हैं।
किराया, मंडी शुल्क के बाद देंगे टैक्स
मंडी समिति के पत्र के जवाब में नगर पालिका ने आवंटियों की डिटेल मांगी है। साथ ही साफ किया है कि यदि भविष्य में स्वामित्व आदि का विवाद उठता है तो मंडी प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। मंडी प्रशासन सूची तैयार करने में जुट गया है। इससे साफ है कि अब तक का किराया, डेढ़ फीसदी मंडी शुल्क व सेस देने वाले व्यापारियों को अब पालिका का टैक्स भी चुकाना पड़ेगा।
मंडी की स्थिति एक नजर में
आवंटित गल्ला की दुकानें - सी श्रेणी में 125, बी श्रेणी में 76 व ए श्रेणी में 41
सब्जी मंडी की दुकानें - बी श्रेणी में 20 व सी श्रेणी में 30
आवंटित आवास - 28
यूपी राज्य भंडारण निगम - 4 एकड़ भूमि (जिस पर गोदाम बने हैं)
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परिसीमन में आने पर मंडी पर टैक्स का आंकलन किया गया है। लगातार पत्राचार के बाद आवंटियों से सीधे वसूली की बात कही गई है। इस संबंध में आवंटियों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका
नियमानुसार आवंटी ही नगर पालिका द्वारा लगाए गए टैक्स का भुगतान करेंगे। इस संबंध में नगर पालिका का पत्र लिखा गया है। मंंडी प्रशासन के अधीन भवनों का टैक्स दिया जा चुका है।
-गौरव सिंह, मंडी सचिव