शहर के एक स्टूडियो पर टैटू बनाता आर्टिस्ट। स्रोत : स्वयं
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जिले में बदलती लाइफस्टाइल और व्यक्तिगत सौंदर्य के बढ़ते चलन ने स्थानीय व्यापार के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। फैशन के इस नए दौर में युवाओं का टैटू के प्रति बढ़ता क्रेज अब सिर्फ एक शौक न रहकर अधिक लाभ वाले सेवा कारोबार का रूप ले चुका है। शहर के कॉमर्शियल सेंटर्स में टैटू स्टूडियोज की मांग में इजाफा देखा जा रहा है।
स्थानीय बाजार में टैटू आर्टिस्ट्स के पास युवाओं की आवाजाही दर्ज की जा रही है। ग्राहक मुख्य रूप से कलाई और गर्दन पर स्पिरिचुअल, लव-थीम, पोट्रेट और ट्रेंडिंग कलरफुल डिजाइंस की मांग कर रहे हैं। व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो इस उद्योग में क्वालिटी और सेफ्टी ही सफलता की कुंजी है।
ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए शहर के प्रमुख और रजिस्टर्ड टैटू मेकर्स स्वच्छता व सुरक्षा मानक का पूरा ध्यान रख रहे हैं। टैटू आर्टिस्ट्स अपने सर्विस मॉडल में फ्रांस से आयातित इंक और मेडिकल-ग्रेड के डिस्पोजेबल टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल त्वचा पर किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स का खतरा खत्म होता है बल्कि बेहतरीन फिनिशिंग और लंबे समय तक टिकने वाले परिणाम मिलने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है।
500 रुपये प्रति इंच का प्रीमियम रेट
कॉमर्शियल तौर पर यह सेक्टर काफी लाभदायक साबित हो रहा है। शहर में टैटू की सर्विस दरें डिजाइन की जटिलता और साइज के आधार पर तय होती हैं, जो औसतन 500 रुपये प्रति इंच से शुरू होती हैं। स्मॉल साइज डिजाइंस से लेकर फुल-स्लीव टैटू तक की बुकिंग से स्टूडियोज को बेहतरीन रिटर्न मिल रहा है।