हाथरस प्रदेश में आगरा और फर्रुखाबाद के बाद तीसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक जिला बन गया है। बीते दो वर्षों में बढ़ी निर्यात की संभावनाओं ने जिले को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई जगह दिलाई है। जिले की सादाबाद और सासनी तहसील क्षेत्र के गांवों में आलू की 3797, एलआर, सूर्या और संताना किस्मों की पैदावार तेजी से बढ़ी है।
हाथरस के आलू निर्यात की स्थिति
- भारत के कुल निर्यात में : छह फीसदी हिस्सा अकेला हाथरस
- मलयेशिया ने खरीदा : 18.64 करोड़ का आलू
- निर्यात में वृद्धि : पांच प्रतिशत
- 2025-26 का शुरुआती आंकड़ा : 53.68 करोड़ का निर्यात
भारतीय आलू की मांग क्यों बढ़ी
- यूरोप में बिजली महंगी और मौसम प्रतिकूल होना।
- चीन में उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होना।
- सादाबाद व सासनी : प्रोसेसिंग किस्मों का केंद्र
- प्रमुख किस्में : 3797, एलआर, सूर्या, संताना
- उपयोग : चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, स्टार्च, पाउडर, स्नैक्स
सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों को भी होगा निर्यात
आलू उत्पादक किसानों के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। हाथरस, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, बाराबंकी और उन्नाव सहित पूरी आलू बेल्ट का उत्पादन अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पैर जमाने वाला है। 20 अप्रैल से अफ्रीकी देशों और 15 मई से सऊदी अरब के लिए आलू निर्यात की औपचारिक शुरुआत होगी।
क्वालिटी टेस्ट और लैब रिपोर्ट के बाद 3797, चिप्सोना, सिंदुरी और होलैंड जैसी किस्में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी हैं। इसके बाद सऊदी अरब सरकार ने पहले चरण में यूपी से करीब 6.20 लाख टन आलू मंगवाने की मंजूरी दे दी है। नवंबर तक हर महीने इतने ही आलू का निर्यात जारी रहेगा। अफ्रीका के अंगोला, मिस्र, तंजानिया, केन्या और मोरक्को जैसे देशों ने चीन और यूरोपीय देशों की जगह भारत के आलू पर भरोसा जताया है। इन देशों ने भारत से करीब 3.48 मिलियन टन आलू आयात करने की मंजूरी दी है।