कहते हैं कि एक शिक्षित और सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को संवारती है, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा दे सकती है। हाथरस की तनीषा इस बात का साक्षात उदाहरण हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश करते हुए तनीषा आज जिले के सैकड़ों युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं।
शहर के घंटाघर निवासी तनीषा अग्रवाल की शादी वर्ष 2022 में दीपक रवि अग्रवाल से हुई। उनके पति वर्ष 2018 से ही युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे थे। शादी के बाद तनीषा ने घरेलू जिम्मेदारियों तक खुद को सीमित रखने के बजाय पति के इस सेवा भाव को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया। तनीषा का सपना था कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी होनहार बच्चे का सुनहरे भविष्य का सपना न टूटे।
तनीषा ने बताया कि वे कोचिंग में दाखिला देने से पहले बच्चों की पारिवारिक स्थिति की गहनता से जांच करती हैं, ताकि मुफ्त शिक्षा का लाभ सिर्फ और सिर्फ जरूरतमंद और सही हकदार को ही मिल सके। उनकी इस परख और बच्चों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि पिछले चार सालों (2022 से अब तक) में वे 250 से अधिक बच्चों को तराश चुकी हैं। इनमें से 100 से अधिक युवा आज देश के विभिन्न विभागों में सरकारी नौकरी पाकर अपने परिवारों की स्थिति संवार चुके हैं।
अग्निवीर परीक्षा में भी लहराया परचम
हाल ही में घोषित हुए अग्निवीर परीक्षा के परिणाम में इस संस्थान का दबदबा रहा। कोचिंग से कुल 18 बच्चों का चयन हुआ है, जिनमें से चार बच्चे ऐसे हैं, जो बेहद आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे और तनीषा की देखरेख में पूरी तरह निशुल्क पढ़ाई कर रहे थे।
पति ने बच्चों के भविष्य के लिए छोड़ दी थी नौकरी
इस सफर में तनीषा और उनके पति का समर्पण अद्वितीय है। तनीषा ने गर्व से बताया कि उनके पति दीपक की वर्ष 2015 में रेलवे में नौकरी लग गई थी, लेकिन जिले के होनहारों को बेहतर भविष्य देने की खातिर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
जिले में उच्च स्तर के शैक्षणिक संस्थानों की कमी है। ऐसे में गरीब बच्चों को कोचिंग के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे पढ़ाई और रहने का खर्च दोगुना हो जाता है। हमारा प्रयास है कि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपना शहर न छोड़ना पड़े।
तनीषा अग्रवाल, शिक्षक