शहर में एक दुकान पर इमरती तैयार करते कारीगर। संवाद
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पितृपक्ष में इमरती की मांग ने शहर के मिष्ठान बाजार को गुलजार कर दिया है। उड़द की दाल और चाशनी की सोंधी खुशबू से दुकानें महक रही हैं। श्राद्ध और तर्पण के भोजन में इसका विशेष धार्मिक व पारंपरिक महत्व है। कारोबारियों के अनुसार जनपद में सौ क्विंटल से इमरती की खपत इन दिनों हो रही है।
शहर की करीब 110 छोटी-बड़ी दुकानों पर इन दिनों इमरती तैयार हो रही हैं। सुबह होते ही कढ़ाई चढ़ जाती हैं और ग्राहक पहुंचने लगते हैं। सामान्य दिनों में नाश्ता, कचौड़ी और बेड़ई बेचने वाले छोटे दुकानदार भी इमरती के थाल सजा रहे हैं। मुरसान गेट बाजार के मिठाई कारोबारी उमंग वार्ष्णेय ने बताया है कि पितृपक्ष में प्रतिदिन 100 क्विंटल से अधिक इमरती की खपत हो रही है। एकादशी, द्वादशी और सर्वपितृ अमावस्या पर बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है।
इधर, नयागंज से हेमंत कुमार व जितेंद्र कुमार ने बताया है कि उड़द दाल, चीनी और खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से भाव भी बढ़े हैं। पिछले साल की तुलना में 10 से 20 रुपये किलो की वृद्धि हुई है। वनस्पति घी वाली इमरती 220 से 260 और देसी घी वाली 580 से 600 रुपये किलो बिक रही है। इसके बावजूद लोग भोग और ब्राह्मण भोज के लिए खरीदारी कर रहे हैं। हलवाइयों के मुताबिक, 16 दिन का यह दौर साल का सबसे व्यस्त और कमाई वाला समय है।