अपर सत्र एवं जनपद न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-01) में सिकंदराराऊ के चर्चित सत्संग हादसे के मामले की सुनवाई के दौरान 38वें गवाह उपनिरीक्षक शीशपाल सिंह के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा गवाह से तीखी जिरह की गई।
थाना सकरौली जिला एटा में तैनात उपनिरीक्षक शीशपाल सिंह ने अदालत में शपथ पत्र के जरिये बताया कि दो जुलाई 2024 को वह कोतवाली नगर (एटा) में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ एटा मोर्चरी पहुंचे, जहां गभाना (अलीगढ़) निवासी छह वर्षीय बालक शिवराज पुत्र सुरेश के शव का निरीक्षण कराया गया और परिजनों से शिनाख्त कराई गई।
इसके बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम की नियमानुसार कार्रवाई पूरी की गई, जिसमें चालान लाश, पुलिस फॉर्म और सीएमओ की चिट्ठी शामिल थी। बचाव पक्ष की ओर से की गई जिरह में उपनिरीक्षक ने स्वीकार किया कि मृतक बालक के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे। पंचनामा में पंचों की राय के आधार पर मृत्यु का कारण भगदड़ के दौरान दबने से दम घुटना दर्ज किया गया था।
शव को मोर्चरी लाने और थाने में सूचना दर्ज होने के समय को लेकर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए। बचाव पक्ष द्वारा पुलिस पर जांच में फर्जीवाड़े और झूठी गवाही देने की आशंका जताई, जिसे गवाह ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद मामले की अगली सुनवाई की तिथि 10 सितंबर तय की गई है।