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Hathras News: पढ़ाई पेड़ों की छांव में, रिपोर्ट मोबाइल पर

Sun, 10 May 2026 01:43 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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संविलियन विद्यालय कोरना में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते बच्चे। संवाद - फोटो : Samvad
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प्रदेश सरकार प्राइमरी शिक्षा पर हर महीने करोड़ों रुपये वेतन और संसाधनों पर खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। कई स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हैं, जिनके पठन पाठन की रिपोर्ट मोबाइल से भेजी जाती है।
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जिले के कई सरकारी स्कूलों की स्थिति यह है कि कहीं बिल्डिंग ध्वस्त हो चुकी है तो कहीं सालों से नए कमरों के निर्माण का इंतजार है। कहीं सात शिक्षकों पर मात्र 60 बच्चे हैं, तो कहीं एक ही कमरे में पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठने को मजबूर हैं।



यह विडंबना ही है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कई स्कूलों में बच्चों के पास बैठने के लिए कमरा, फर्नीचर और छत तक नहीं है। ढाई से चार साल का समय बीतने के बाद भी स्कूलों के भवनों का निर्माण न होना प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है।
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डीसी निर्माण दुष्यंत गौतम के अनुसार जिले के 112 जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। जिनको ध्वस्त किया जाना है। 14 जर्जर भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है। बजट मिलते ही नए निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। अब तक 14 कक्ष बनाए गए हैं।




केस-1: एक कमरा और पेड़ की छांव (प्रा वि महामौनी)
यहां कुल 67 छात्र हैं। प्रधान अध्यापक मीरा चंदेल सहित पांच शिक्षिकाएं हैं। दो साल पहले जर्जर बिल्डिंग ध्वस्त होने के बाद अब केवल एक कमरा शेष है। इसी कमरे में स्कूल का सामान भी रखा जाता है, जिसके चलते बच्चों को विवश होकर पेड़ के नीचे शिक्षा लेनी पड़ रही है।



केस-2 : बारिश और गर्मी में मुश्किलें (संविलियन वि कोरना)
इस विद्यालय में 188 बच्चे, सात शिक्षक और दो शिक्षा मित्र हैं। आंगनबाड़ी केंद्र भी यहीं पर है। दो साल पहले जूनियर हाई स्कूल की बिल्डिंग टूटने के बाद से प्राइमरी के मात्र चार कमरों में पूरा स्कूल सिमट गया है। जगह की कमी के कारण बच्चे बरामदे और पेड़ के नीचे बैठते हैं। बारिश और गर्मी में उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।




केस-3 : दो कमरों में सिमटा स्कूल (संविलियन वि. रोहई)
यहां 144 बच्चे और छह शिक्षकों का स्टाफ है। प्राथमिक विभाग की बिल्डिंग चार साल पहले ध्वस्त हो चुकी है और जूनियर हाईस्कूल की बिल्डिंग को भी जर्जर घोषित कर दिया गया है। वर्तमान में प्राथमिक के केवल दो कमरों और बरामदे में कक्षाएं संचालित हैं।




केस-4 : ढाई साल से निर्माण का इंतजार (प्रा. वि. नगला मंसा)
यहां 61 बच्चे पढ़ते हैं और प्रधानाध्यापिका ममता सहित पांच शिक्षकों/शिक्षामित्रों का स्टाफ है। ढाई साल पहले बिल्डिंग ध्वस्त होने के बाद से स्कूल एक कमरे में चल रहा है। इसकी कमरे में एक से पांच तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। जगह की तंगी के कारण बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र के साथ-साथ खुले में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है।





केस-5 : स्टाफ की कमी बड़ी समस्या (प्रा. वि. नगला मोती राय)
इस विद्यालय में 52 बच्चे और प्रधानाध्यापक श्याम बाबू सहित तीन शिक्षक तैनात हैं। यहां की एक मुख्य समस्या यह है कि नियुक्त शिक्षा मित्र पिछले छह महीनों से ड्यूटी से नदारद हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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