तहसील सदर प्रांगण में धरने पर बैठे दस्तावेज लेखक व अधिवक्ता।
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रजिस्ट्री कार्यालय के निजीकरण का विरोध जारी है। बुधवार को तहसील सदर में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों ने कामकाज ठप रखा। जिससे तहसील परिसर में आए फरियादियों को वापस लौटना पड़ा। वक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्री व्यवस्था का निजीकरण पूरी तरह से जनविरोधी है।
यह नया नियम न केवल अधिवक्ताओं, बल्कि सालों से इस पेशे से जुड़े दस्तावेज लेखकों (डीड राइटर्स) और टाइपिस्टों के रोजगार को भी प्रभावित कर रहा है। सरकार के इस फैसले से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन और हड़ताल जारी रहेगी।