जिले में बदलती जीवनशैली और लगातार बढ़ते मानसिक तनाव के कारण उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में हर महीने बीपी के मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी चिंता में है।
जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त माह में कुल 228 मरीज उच्च रक्तचाप की शिकायत लेकर पहुंचे। वहीं सितंबर माह में यह आंकड़ा बढ़कर 267 तक पहुंच गया। पिछले महज 12 दिनों के भीतर ही 67 मरीज बीपी की समस्या के साथ अस्पताल आ चुके हैं। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रभावित होने वाले कुल मरीजों में 35 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं व कामकाजी लोगों की संख्या 67 प्रतिशत है।
हार्मोनल असंतुलन भी जिम्मेदार : फिजिशियन डॉ. अवधेश कुमार के अनुसार, अत्यधिक मानसिक तनाव, एंग्जायटी और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण शरीर के भीतर हार्मोनल असंतुलन पैदा होने लगता है। अत्यधिक तनाव की स्थिति में शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोंस का स्राव बहुत तेजी से बढ़ जाता है।
इनके बढ़ने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं, जिससे हृदय को पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और रक्तचाप अचानक उच्च हो जाता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर यह दिल की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। संवाद