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सपा-कांग्रेस पर हमला, बसपा पर मौन साधा

Sat, 04 Feb 2017 11:15 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
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पीसी बागला कॉलेज में चुनावी सभा को संबोधित करते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक तरफ कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर नाम लेकर जबर्दस्त शब्द बाण चलाए, लेकिन पूरे भाषण में उन्होंने कहीं भी बसपा या उसकी नेता मायावती का कोई जिक्र नहीं किया, जबकि हाथरस जिले में बसपा ही भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानी जाती रही है। जिले की तीन में से दो विधानसभा सीटें भी बसपा के पास हैं और लोकसभा चुनाव में भी उसका मुकाबला बसपा से ही हुआ। 
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बसपा के प्रति शाह की इस नरमी को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं और अटकलें शुरू हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि भविष्य के सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए शाह ने बसपा सुप्रीमो पर टिप्पणी करने से परहेज किया, जबकि दो दिन पूर्व ही बसपा सुप्रीमो ने इसी बागला कॉलेज के मैदान में नोटबंदी समेत तमाम मुद्दोें पर भाजपा और पीएम मोदी पर जमकर हमले किए थे।

उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर भाजपा की सरकार बन गई तो दलित-अल्पसंख्यकों का आरक्षण छिन जाएगा। इतने पर भी बसपा सुप्रीमो पर शाह की चुप्पी ने भाजपाइयों को भी हैरान कर दिया। सियासी विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा आलाकमान को शायद यह अंदाजा है कि भविष्य में यदि त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर सामने आती है तो सरकार बनाने के लिए भाजपा को दूसरे दलों की मदद की भी जरूरत पड़ सकती है। 
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मौजूदा सियासी हालात में बसपा ही वह विकल्प है, जिसे भाजपा अपना पाएगी। शायद यही वजह है कि शाह ने अपने आधा घंटे के पूरे भाषण में बसपा या मायावती का जिक्र तक नहीं किया। उनका पूरा हमला राहुल गांधी और सीएम अखिलेश पर ही सीमित रहा। 

भाजपा अध्यक्ष की इसके पीछे सोच क्या रही होगी, यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन बसपा पर उनकी चुप्पी सियासी हलकाें में कई सवाल जरूर खड़े कर गई।

नोटबंदी पर चुप्पी को लेकर चर्चाएं
जिस नोटबंदी पर विपक्ष लगातार भाजपा और केंद्र सरकार को घेर रहा है, उस सबसे महत्वपूर्ण को भी शाह ने बिल्कुल नहीं छेड़ा, जबकि हजारों की भीड़ पूरे भाषण के दरम्यां यही इंतजार करती रही कि आखिर शाह नोटबंदी पर भाजपा का पक्ष कैसे रखेंगे और इससे पैदा हुए हालात पर सरकार के कदमों के बारे में क्या जानकारी देंगे। शाह ने कांग्रेस सरकार की विफलताओं का तो सिलसिलेवार जिक्र किया, लेकिन नोटबंदी के मुद्दे को छेड़ा तक नहीं, जबकि चुनाव से पहले तक शाह नोटबंदी पर सरकार का पक्ष बेहद मजबूती से रखते रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि भाजपा को शायद अंदाजा है कि नोटबंदी को लेकर लोगों में कहीं न कहीं नाराजगी है और इस मुद्दे को छेड़ने से गुस्से को हवा मिल सकती है, इसलिए भाजपा अध्यक्ष ने इसका जिक्र करना जरूरी नहीं समझा।

मोदी स्टाइल में शाह ने उछाले तीखे सवाल 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी पीएम मोदी के अंदाज में लोगों की दुखती रग पर हाथ रखा। उन्होंने भीड़ के बीच सवाल उछाला कि यूपी के गांवों में 24 घंटे बिजली आती है क्या। यहां हर गांव में अस्पताल है क्या। हर गांव सड़क से जुड़ चुका है क्या। महिलाओं की सुरक्षा है क्या। मोदी स्टाइल में ही उन्होंने एक किस्सा सुनाया। बोले कि जब वह राष्ट्रीय कार्यालय पर जनता दरबार लगा रहे थे तो एक बुजुर्ग ने उन्हें बताया कि वह बैलगाड़ी से चीनी बेचने गया था। चीनी बेचने के बाद जब अमरूद खरीद रहा था तो उसका बैल चोरी हो गया। शाह बोले मैने उससे पूछा कि जब आजम               खां की चोरी गई भैंस मिल सकती               है तो तुम्हारा बैल क्यों नहीं। बुजुर्ग बोला, नहीं मेरा बैल नहीं मिलेगा, क्योंकि उसे पशु तस्कर ले गए                  और कत्लखाने में ले जाकर कटवा दिया। इसलिए भाजपा सरकार बनने पर प्रदेश के सभी कत्लखाने बंद कराए जाएंगे। इस किस्से पर शाह को खूब तालियां मिलीं। उन्होंने मोदी स्टाइल में ही राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी सवाल उछाले और फिर खुद ही आरोपों की शक्ल में उनका जवाब दिया। 
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