शहर के मोहल्ला रमनपुर की चौपाल पर भी राजनीतिक चर्चाओं का जोर है। हर तरफ प्रत्याशियों की हार-जीत का गुणा-भाग लग रहा है। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की हार-जीत से लेकर सूबे में बनने वाली सरकार की संभावनाओं पर मंथन किया जा रहा है।
हर किसी की अपनी दलीलें हैं और अपने दावे। आंकड़ेबाजी से प्रत्याशियों की हार-जीत तय की जा रही है। सूबे में अलग-अलग पार्टियों की सरकार बनने के दावे भी किए जा रहे हैं। सुबह से शाम तक रमनपुर मोहल्ले के चबूतरों पर चौपाल सजी नजर आती हैं। क्या बुजुर्ग और क्या नौजवान, सब अपने-अपने नजरिए से चुनावी विश्लेषण में मशगूल हैं। दलीलों और दावों से सब चुनाव से पूर्व ही चुनाव नतीजों की तस्वीर पेश करते हैं।
लोकेश शर्मा कह रहे थे कि इस बार फलां पार्टी के प्रति गांवों में नाराजगी है। उसकी सरकार बनने के चांस बहुत कम हैं। भिक्कोमल पाठक उनकी बात काटते हुए बोले कि प्रदेश में फलां पार्टी की लहर चल रही है। वोटर मन बना चुके हैं।
नतीजों से सब साफ हो जाएगा। मुकेश शर्मा ने बताया कि जातिगत आंकड़े फलां पार्टी के पक्ष में लग रहे हैं। ऐसा नहीं हो कि यह पार्टी सबको चौंकाते हुए अपनी सरकार बना ले जाए। यशपाल सिंह ने कहा कि अबकी ऐसा विधायक चुनना चाहिए, जोकि हमारी बस्तियों की वर्षों पुरानी समस्याएं दूर करा सके।
जीतने के बाद वादे तो सभी कर जाते हैं, लेकिन हालात देखने कोई नहीं आता। राजेश तोमर का कहना था कि फलां पार्टी से जनता दुखी है, इसलिए इस बार चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। सभी उसके खिलाफ वोट करने का मन बना चुके हैं।
रनवीर सिंह बोले प्रदेश में चाहे किसी की भी सरकार बने, लेकिन जिले में तो फलां पार्टी का ही बोलबाला रहेगा। विजय कुमार ने उनकी बात का समर्थन किया, जबकि कन्हैयालाल का कहना था कि जब चुनाव नतीजे आएंगे तो सबके अनुमान और आंकड़े धरे रह जाएंगे। चुनावी हवा तेजी से बदल रही है।