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कोई दिवाना कहता है कोई पागल समझता है...

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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है...
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एक शाम अटल के नाम कार्यक्रम में कुमार विश्वास की कविताओं ने किया मंत्रमुग्ध
भोर तक चला कार्यक्रम, कवि-कवियित्रियों ने अटल जी को किया नमन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। मेला श्रीदाऊजी महाराज में हुए एक शाम अटल जी के नाम कार्यक्रम में प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अटल जी को नमन करते हुए कविताएं प्रस्तुत कर समा बांधा। ठहाकों के साथ तालियों की गड़गड़ाहट से मेला पंडाल परिसर गुंजायमान हो गया।
कई प्रांतों से आए नामचीन कवि कवियित्रियों ने काव्य पाठ किया। कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अध्यक्षता आचार्य देव ने की और संचालन मनवीर मधुर ने किया। संयोजक तरुण शर्मा, सह संयोजक जय शर्मा ने सभी कवि कवियित्रियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
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डॉ. कुमार विश्वास के मंच पर आते ही श्रोताओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। युवा कुमार विश्वास के अंदाज से रूबरू हुए। भारत माता की जय के नारे लगाए गए।
में अपने गीत गजलों में उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई शोहरत उसी के नाम करता हूं।
हवा का काम है चलना, दीये का काम है जलना, वो अपना काम करती है में अपना काम करता हूं।
इस पंक्ति के बाद युवाओं ने वन्स मोर की आवाज लगानी शुरू कर दी। युवाओं की मांग पर कुमार विश्वास ने फिर से इस कविता का काव्य पाठ किया।
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।
में तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है, ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है।
इस पंक्ति पर श्रोता अपनी कुर्सियों से उठ गए और जमकर तालियां बजाईं।
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मुझ को मारकर खुश है सारा राज उस पर है, यकीनन कल मेरा है, आज बेशक राज उस पर है।
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बरेली से आई डॉ. कविता अरोड़ा ने इन दिनों चढ़ रहे केसरिया रंग पर कविता प्रस्तुति की।
कौन रोकेगा अब ये उड़ान, चढ़ो है रंग केसरियो, चढ़ो है रंग केसरियों।
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मथुरा के मनवीर मधुर ने बृज की द्वार देहरी की महिमा का वर्णन करते हुए रचना पेश की।
यहां दाऊजी पूर्ण कराते जो वृत ठाना जाता है, क्योंकि इसे बृज देहरी सदियों से माना जाता है।
रबड़ी, रसिया, हींग, चाकू चाहे प्रसिद्ध रहे, किंतु हाथरस काका और निर्भय से जाना जाता है।
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इगलास के विजय भारद्वाज ने देश की अखंडता पर रचना पेश करते हुए कहा कि
धर्म रक्षकों की प्रतिज्ञा धर्म रक्षा के लिए घूंट घूंट घूंट कालकूट पिया जाएगा।
मुुड़ भेंट शत्रुओं के झुंड को करेंगे रुड नब्ज नाड़ी स्वांस को त्याग जिया जाएगा।
परिधि प्रताप से गढ़ी गई है वीर इसे भोगते हैं, इसका न रच दिया जाएगा।
खंडित ये राष्ट्र, अखंड किया जाएगा ही अंड बंड बैरियों को झंड किया जाएगा।
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बरेली के आचार्य देवेंद्र देवे पे हिंदुस्तान के पराक्रम पर यह रचना प्रस्तुत की।
हमारे अज्म को क्या सिरफिरा शैतान देखेगा। कि सारे सिरफिरों को अपना हिंदुस्तान देखेगा।
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लखनऊ की कविता तिवारी ने शहीदों पूजा पर कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि
क्षितिज तक शौर्य गूंजेगा, स्वयं दिनमान बदलेगा। उतारो भारती आरती सम्मान बदलेगा।
विवादों में उलझकर कीर्ति मां की मत करो धूमिल शहीदों की करो पूजा हिंदुस्तान बदलेगा।
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मध्यप्रदेश के पचौर से आए चेतन चर्चित ने अटल को नमन करते हुए कविता पेश की
ओज कविताओं के हिमालय रहें अटल, वह मृत्यु अग्नि से पिघल सकता नहीं, जल सकता है ढल सकता है किंतु पश्चिम से सूर्य निकल सकता नहीं।
वेदना के शब्द देने वाला राजनीति में भी सच्चा कवि है तो बदल सकता नहीं, पश्चिम से सूर्य तो निकल सकता है नहीं, देशवासियों के दिल में है अटल और जो अटल है वो टल सकता नहीं।
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डॉ. नितिन मिश्रा ने इश्क के इजहार पर कविता पेश करते हुए कहा
समंदर की उठी लहरों से आंखें भर नहीं पाए, हमें इजहार करना था मगर हम कर नहीं पाए।
समय मिल नहीं पाया कि कुछ कहते या कुछ सुनते, उधर सब ख्वाब जिंदा थे, इधर हम मर नहीं पाए।
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राजस्थान धौलपुर से आए रामबाबू सिकरवार ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कविता प्रस्तुत की
सब आंकड़े मोदी ने अस्त-व्यस्त कर दिए जो उठ रहे सवाल सब निरस्त कर दिए।
गठबंधन टेंट सुनामी में बह गए जितने भी किले ध्वस्त कर दिए।
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गंजडुंडवारा (एटा) अंज्म शाकरी ने इश्क पर यह कविता सुनाई।
उससे मिलने की जन्नत जू भी है, और वो मेरे रूबरू भी है।
हमने सोचा था दिल जला डाले फिर ख्याल आया दिल में तू ही है।
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इसके अलावा कवियों व कवियित्रियों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने से लेकर विंग कमांडर अभिनंदन की बहादुरी पर कविताएं प्रस्तुत कीं। देश की राजनीति में आए बदलाव के नारों पर खूब ठहाके लगवाए। सुबह साढ़े चार बजे तक कार्यक्रम चला। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष गौरव आर्य, सदर विधायक हरीशंकर माहौर, सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राना, डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार, एडीएम डॉ. अशोक कुमार शुक्ला, एएसपी सिद्धार्थ वर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा, डॉ. अविन शर्मा, शरद तिवारी, सांसद पत्नी श्वेता दिवाकर, सुनीत आर्य, देशदीपक रावत, डॉ. वीपी सिंह, सहित तमाम भाजपाई व अन्य लोग मौजूद थे।
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31 साल पहले पहली बार पढ़ी कविता
रात को 12 बजकर 56 मिनट पर डॉ. कुमार विश्वास ने माइक संभालने के साथ कहा कि दो सितंबर को 31 साल पहले मैने सबसे पहले हापुड़ में कविता पढ़ी थी। उन्होंने कहा कि हिंदी के कवियों को विचार करना पड़ेगा। माल अच्छा लाएं, बाजार में अपने आप बिकेगा। अटल के साथ शिखर वार्ता का जिक्र किया।
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निजी सहायक ने लिया आशीर्वाद
एक शाम अटल के नाम कार्यक्रम में आए पूर्व पीएम अटल जी के निजी सहायक पं. शिवकुमार पारिख से डॉ. कुमार विश्वास ने पांव छूकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि वह शिवकुमार जी को काफी समय से जानते हैं। अटल जी से शिवकुमार जी सहजता से मुलाकात कराते थे।
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