न्यायमूर्ति प्रतिन्कर दिवाकर ने सभी जनपद न्यायाधीशों से कहा कि छोटे आपराधिक मामले, जिनको अर्थदंड के आधार पर समाप्त किया जा सकता है, उनका निस्तारण 8, 9 व 10 फरवरी को आयोजित हो रही विशेष लोक अदालत व 11 फरवरी की राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जाए।
उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रतिन्कर दिवाकर उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से न्यायिक अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में उन्होंने 11 फरवरी को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में ज्यादा से ज्यादा वाद निस्तारित करने के निर्देश दिए।
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न्यायमूर्ति प्रतिन्कर दिवाकर ने सभी जनपद न्यायाधीशों से कहा कि छोटे आपराधिक मामले, जिनको अर्थदंड के आधार पर समाप्त किया जा सकता है, उनका निस्तारण 8, 9 व 10 फरवरी को आयोजित हो रही विशेष लोक अदालत व 11 फरवरी की राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जाए।
जनपद न्यायाधीश मृदुला कुमार ने कहा कि पक्षकार अपने वाद का निस्तारण विशेष लोक अदालत एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कराकर लाभ उठा सकते हैं। लोक अदालत में निस्तारित मामलों की अपील नहीं होती है। यहां समय एवं धन की बचत होती है। दोनों पक्षों की विजय होती है। लोक अदालत में आपसी सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित सिविल वादों में कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है।