हादसा 2 जुलाई दोपहर करीब दो बजे हुआ। उस समय सत्संग समाप्त हो गया था और भीड़ अपने वाहनों की ओर जा रही थी। इसी दौरान सत्संग में स्वयंसेवकों भोले बाबा के वाहनों के काफिले को निकालने भीड़ रोक दिया। स्वयंसेवकों ने लाठी डंडों से भीड़ को धकियाकर रोकने और बाबा के काफिले की चरण धूल लेने की होड़ के बीच कुछ महिलाएं गिर पड़ी। इसी बीच स्वयं सेवकों ने उन्हें धकेला तो वहां भगदड़ मच गई और गिरे लोगों को पीछे से आ रहे लोग कुचलते गए। इस भगदड़ के दौरान काफी संख्या में लोग एनएच के सहारे कीचड़युक्त खेत में गिर गए और उनके ऊपर से भी भीड़ गुजरती चली गई। आनन-फानन आसपास के ग्रामीणों ने राहत व बचाव कार्य शुरू किए और प्रशासन को सूचना दी। तब जाकर घायलों और शवों को जो भी वाहन मिला, उससे सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर और एटा के मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया।
पुलिस-प्रशासन ने भले ही 116 की मरने की पुष्टि की है, लेकिन यह आंकड़ा अधिक हो सकता है। शाम तक करीब 97 शव सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर पर लाए गए। इनमें 85 महिलाएं, चार बच्चों और तीन पुरुषों के शव थे। 27 शव एटा मेडिकल कॉलेज पहुंचे हैं। इनकी संख्या और बढ़ सकती है। कुछ शवों को परिजन सिकंदराराऊ से बिना पोस्टमार्टम और पंचनामा भरवाए लेकर चले गए। सत्संग में अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, कासगंज, आगरा सहित हरियाणा से भी अनुयायी पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि सत्संग के पंडाल में हजारों की संख्या लोग पहुंचे थे और वहां गर्मी व उमस भरा माहौल था। सत्संग के समाप्त होने के बाद लोग वहां निकलकर अपने वाहनों तक पहुंचने की जल्दी में थे। मरने वालों में दो की पहचान हाथरस के गांव नगला बिहारी निवासी शीला देवी और इंद्रवती के रूप में हुई है। बाकी लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। एक महिला की पहचान प्रेमवती देवी (72) पत्नी दलवीर सिंह निवासी तुलसी विहार दादरी गौतमबुद्धनगर के रूप में हुई है। एक की पहचान एटा में हुई है।