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फाइनल ग्रुप की परीक्षा छूटने पर शुभम ने छोड़ा था घर

Thu, 23 Mar 2017 11:45 PM IST
अमर उजाला, हाथ्ारस
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शुभम माहेश्वरी - फोटो : अमर उजाला
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एक महीने से भी ज्यादा समय तक लापता रहे सीए छात्र शुभम माहेश्वरी के पिता अंबरीष माहेश्वरी बुधवार देर रात घर लौटे। गुरुवार को उन्होंने तमाम अफवाहों और चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मीडियाकर्मियों को शुभम के मिलने की जानकारी दी। अंबरीष माहेश्वरी ने बताया कि सीए की फाइनल ग्रुप की परीक्षा छूटने के कारण शुभम खुद को दोषी मान बैठा था, इसलिए परिजनों का सामना करने से बच रहा था। यही वजह थी कि वह नेपाल चला गया। इसके बाद तेजी से हुए घटनाक्रम को देख शुभम वापस लौटने की हिम्मत नहीं जुटा सका। कहा कि भला हो सोशल मीडिया का, जिसकी मदद से हम शुभम तक पहुंच गए। शुभम की तलाश में दिन-रात एक करने वाली जेवर पुलिस और एसटीएफ की भी तारीफ की है।
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उन्होंने बताया कि शुभम अभी दिल्ली में हैं। वह अभी भी पूरे घटनाक्रम को भूल नहीं पा रहे। शुभम की हालत सामान्य होने पर वह हाथरस आएंगे। बेटे के मिलने से बेहद खुश अंबरीष माहेश्वरी के मुताबिक शुभम को बीते साल सीए के दो फाइनल ग्रुप पास करने थे। इनमें से एक को उसने मई 2016 में पास कर लिया था। दूसरे की परीक्षा नवंबर 2016 में थी। इस बार शुभम की तैयारी पूरी नहीं थी। उसने यह परीक्षा छोड़ दी। उसे अगली परीक्षा के लिए छह महीने तक और इंतजार करना था।

परिजनों को आधे मन से उसने परीक्षा छोड़ने की बात तो बता दी, लेकिन वह उदास रहने लगा। परीक्षा छूटने की हताशा के बावजूद शुभम ने दिल्ली में अपनी कोचिंग पूरी की। वह 18 फरवरी को दिल्ली से हाथरस के लिए चला, लेकिन शुभम अपने परिजनों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। यह पहला मौका था, जब उसने तैयारी नहीं होने की वजह से कोई परीक्षा छोड़ी थी। आखिरकार जेवर टोल प्लाजा पर जब बस कुछ देर के लिए रुकी तो शुभम ने घर से दूर जाने का निर्णय ले लिया।
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ऋतिक, सहवाग, स्मृति ने भी किया ट्वीटः उधर, फाइंडिंग शुभम माहेश्वरी कैंपेन सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा था। शुभम की रिश्ते की बहन और पत्रकार ऋचा के शुभम को खोजने को लेकर ट्विटर पर छेड़े गए अभियान को ट्वीट कर ऋतिक रोशन, सहवाग और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ट्वीट कर आगे बढ़ाया।

बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाकर काटे दिन
शुभम के पास महज दो-तीन हजार रुपये ही थे। शुभम पहले लखनऊ, फिर गोरखपुर और वहां से नेपाल बॉर्डर से सात-आठ किलोमीटर अंदर महोत्री जिले के जलेश्वर कस्बे में पहुंच गए। जेब में रखे रुपये खर्च हो गए तो शुभम ने बोर्डिंग स्कूल ज्वाइन कर लिया। यहां वह दसवीं के छात्राें को अर्थशास्त्र और एकाउंट पढ़ाने लगे। शुभम ने हर रोज सात-सात पीरियड तक पढ़ाए। महज 15 दिन में छात्राें का बचा हुआ, सिलेबस खत्म करा दिया। स्कूल के प्रिंसिपल और पूरा स्टाफ शुभम का मुरीद हो चुका था।

प्रिंसिपल ने परिजनों से किया था संपर्क
 सोशल मीडिया पर चले अभियान का असर यह रहा कि शुभम नेपाल में जिस स्कूल में पढ़ा रहा था, उस स्कूल की प्रिंसिपल ने शुभम की कुछ तस्वीरें परिजनों को भेजी। इन तस्वीरों को देखने के बाद परिजनों ने नेपाल जाने का निर्णय लिया। यहां पिता अंबरीष माहेश्वरी पर शुभम की नजर पड़ गई। शुभम ने अपनेे पिता को फोन कर कहा-पापा, मैने आपको देख लिया है, लेकिन मैं आपका सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। इस पर अंबरीष का गला भर आया। उन्होंने नम आंखों से अपने बेटे से मिलने को कहा।
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