शहर की एक मेटल हैंडीक्राफ्ट फैक्टरी में काम करते कारीगर। संवाद
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खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब जिले के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से मेटल हैंडीक्राफ्ट कारोबार इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है तो दूसरी ओर गैस की किल्लत के कारण इन इकाइयों में उत्पादन कार्य भी बाधित हो गया है।
मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि कई उत्पादों को तैयार करने में गैस का प्रयोग अनिवार्य होता है। गैस की आपूर्ति कम होने से उत्पादन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। वर्तमान में कई इकाइयां पुराने स्टॉक के सहारे काम चला रही हैं, लेकिन यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
कारोबारियों के अनुसार युद्ध के कारण बाहर भेजे जाने वाले तैयार माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। विदेशों से ऑर्डर नहीं आ रहे। इसके चलते पहले ही उत्पादन लगभग आधा रह गया था और अब गैस की किल्लत ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। उद्योग से जुड़े लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि गैस आपूर्ति को जल्द सामान्य कराया जाए, ताकि उद्योगों का कामकाज प्रभावित न हो और श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट न खड़ा हो।
कई उत्पादों को बनाने के लिए गैस का प्रयोग जरूरी होता है। फिलहाल गैस की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कारण उत्पादन पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है। पुराने सिलिंडरों से ही काम चला रहे हैं।
-सोनू वर्मा, हैंडीक्रफ्ट कारोबारी।
अभी तक हम पुराने स्टॉक के सहारे काम चला रहे हैं, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक संभव नहीं है। यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई हमारी जैसी इकाइयों को तो काम बंद करना पड़ सकता है। स्थित सही होने की ही कामना कर रहे हैं।
-ओमप्रकाश वर्मा, हैंडीक्राफ्ट कारोबारी।