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Hathras: गोताखोरों ने गंगा में दूसरे दिन खोज निकाला शिखा का शव, गांव में नहीं जले चूल्हे, कल डूबे थे भाई-बहन

Tue, 26 May 2026 09:56 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

शिखा फुफेरे भाई नीलेश के साथ गंगा नहाते समय बह गई थी। गोताखोरों ने नीलेश का शव तो करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बरामद कर लिया था, लेकिन शिखा का शाम तक पता नहीं चल पाया था। लापता शिखा के परिजनों ने रात में भी खोजबीन कराई, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। 
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शिखा व नीलेश के डूबने के बाद मौत से परिवार में छाया मातम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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गंगा स्नान के दौरान फुफेरे भाई नीलेश के साथ बह जाने के बाद से लापता हाथरस निवासी शिखा के शव को गोताखोरों ने 26 मई सुबह कछला घाट के पास से खोज लिया। गोताखोर शव लेकर घाट पर मौजूद उसके परिजनों के पास पहुंचे तो कोहराम मच गया। परिवार के लोग शव का बिना पोस्टमॉर्टम कराए अपने साथ लेकर चले गए।

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कछला गंगाघाट पर 25 मई सुबह करीब नौ बजे हाथरस जिले में हसायन थाना क्षेत्र के गांव पिछैती निवासी शिखा (12) पुत्री नेत्रपाल अपने फूफा पड़ोसी गांव कानऊ निवासी ओमवीर और उनके परिजनों के साथ गंगा स्नान करने के लिए कछला आई थी। वह फुफेरे भाई नीलेश के साथ गंगा नहाते समय बह गई थी। गोताखोरों ने नीलेश का शव तो करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बरामद कर लिया था, लेकिन शिखा का शाम तक पता नहीं चल पाया था। लापता शिखा के परिजनों ने रात में भी खोजबीन कराई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

पुलिस चौकी इंचार्ज भूपेंद्र सिंह ने बताया कि निजी गोताखोरों के जरिये मंगलवार सुबह में करीब सात बजे फिर से तलाशी अभियान शुरू किया गया। गंगा में हादसा स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर पूरब दिशा में शिखा के शव को बरामद कर लिया गया है। परिवार के लोगों ने शव की शिनाख्त की। इधर, मृतक नीलेश के पिता ओमवीर ने बताया कि शिखा, नीलेश और उनका दूसरा बेटा विकास एक साथ गंगा स्नान कर रहे थे। विकास डूबने लगा तो नीलेश और शिखा उसे बचाने के आगे बढ़ गए और डूबने से दोनों की मौत हो गई।
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नमन का अंतिम संस्कार 25 मई देर रात उसकी ननिहाल टौंड गांव में विधि विधान से किया गया। शिखा का शव मिलने की खबर से पिछौंती गांव में गहरा शोक छा गया। शिखा हाथरस शहर के बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती थी। उसकी मौत के बाद गांव में चूल्हे तक नहीं जले। परिजन और ग्रामीण शव को देखकर करुण विलाप कर रहे थे। 26 मई दोपहर डेढ़ बजे शिखा का शव गांव पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई।

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