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अंधेरगर्दी : बजट इंटरनेट का, भुगतान डीजल का कर दिया

Fri, 24 Apr 2026 02:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
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क्षेत्र पंचायत सासनी में 15वें वित्त आयोग के बजट के उपयोग में बड़ी लापरवाही और वित्तीय अनियमितता सामने आई है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नियमों को ताक पर रखकर इंटरनेट व बिजली खर्च की मद से वाहनों के डीजल का भुगतान किया गया, जबकि इस मद का वाहन या ईंधन से कोई सीधा संबंध नहीं है। नियमानुसार यह प्रक्रिया वित्तीय नियमों के उल्लंघन और हेराफेरी की श्रेणी में आती है।
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हैरानी की बात यह है कि पोर्टल पर दर्ज विवरण में डीजल भुगतान के लिए ''पानी चार्ज पोस्टल, बिजली बिल, इंटरनेट बिल और प्रिंटिंग चार्ज'' जैसे एक्टिविटी कोड का सहारा लिया गया है। सरकारी नियमों के अनुसार जिस कार्य के लिए बजट आवंटित किया जाता है, उसका भुगतान उसी संबंधित ''हेड'' या ''एक्टिविटी कोड'' में होना अनिवार्य है। डीजल के खर्च को इंटरनेट या बिजली के बिल के नाम पर दर्शाना सीधे तौर पर वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर को दर्शाता है।




यह अनियमितता आई सामने
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो 15वें वित्त पर एक अप्रैल को एक बाउचर जनरेट किया गया है। इसमें एक्टिविटी कोड में पानी चार्ज पोस्टल, बिजली बिल, इंटरनेट बिल, प्रिटिंग चार्ज के नाम पर 31 दिसंबर 2025 तक का वाहन के लिए डीजल का 11,143 रुपये का भुगतान संबंधित पेट्रोल पंप को किया गया है। इसी तरह से 11 जुलाई 2025 में प्रशासनिक कार्य के लिए वाउचर जनरेट किया गया है। इस बिल-वाउचर के जरिये 30 जून 2025 तक का डीजल का 27290 रुपये का भुगतान किया गया है। प्रशासनिक कार्य 2021-22 एक्टिविटी कोड के लिए 15 अक्तूबर 2025 में बिल बाउचर जनरेट किया गया है। इसके जरिये दो माह के डीजल का 25092 रुपये का भुगतान किया गया है। इसी प्रकार एक्टिविटी कोड में पानी चार्ज पोस्टल, बिजली बिल, इंटरनेट बिल, प्रिटिंग चार्ज के नाम पर 20 मार्च 2026 के बाउचर जनरेट करते हुए डीजल का 20,375 रुपये का भुगतान किया गया है।
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स्टेशनरी के बजट से ऑपरेटर का वेतन दिया
अनियमितता केवल डीजल तक सीमित नहीं रही। नौ अप्रैल 2025 को जारी एक बाउचर में ''प्रशासनिक स्टेशनरी 2022-23'' का एक्टिविटी कोड दर्शाया गया, लेकिन भुगतान कंप्यूटर ऑपरेटर के वेतन के रूप में 26,250 रुपये का किया गया।





स्टेशनरी व अन्य कोड से डीजल का अगर भुगतान हुआ है तो इसे दिखवाया जाएगा। कोड सही होने चाहिए थे। 15वें वित्त आयोग की धनराशि से वाहनों में डीजल भरवाना पड़ रहा है। मनरेगा में प्रशासनिक मद नहीं बन पा रही है।
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-सुरेंद्र सिंह, बीडीओ सासनी।
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