अभिभावकों पर बढ़ा बोझ
परिवहन सुविधा न होने के कारण अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाने और लाने की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ रही है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जहां निजी साधनों या साझा वाहनों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
अवैध वाहनों का चलन
कई विद्यालयों में बच्चों को ले जाने के लिए बिना फिटनेस वाले वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा बना रहता है। हादसों के बाद इन्हें लेकर अभियान चलाया जाता है, लेकिन अभिभावकों की मजबूरी है कि स्कूल की ओर से सुविधा न होने पर वह मजबूरी में इस तरह के वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजते हैं।
नामी स्कूलों में भी परिवहन व्यवस्था संतोषजनक नहीं
- संत फ्रांसिस स्कूल (दोनों विंग) के पास एक भी वाहन नहीं
- विनायक इंटरनेशनल स्कूल के पास केवल एक 18 सीटर बस
- राजेंद्र लोहिया विद्या मंदिर में भी छात्र संख्या के अनुपात में बहुत कम वाहन
- सेंट जोंस स्कूल के पास भी सिर्फ एक स्कूली वाहन
- पीबीएएस इंटर कालेज के पास नहीं अपना कोई वाहन
- अक्रूर इंटर कालेज में भी परिवहन की सुविधा नहीं
प्रशासनिक निगरानी की जरूरत
शिक्षा और परिवहन विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। अभिभावकों की मानें तो सभी विद्यालयों के लिए न्यूनतम परिवहन मानक तय किए जाने चाहिए और अवैध वाहनों के संचालन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हाथरस जिले में कुल 2368 विद्यालय
- 1235 प्राइमरी व जूनियर विद्यालय
- 44 सीबीएसई के निजी हाईस्कूल व इंटर कॉलेज
- 26 राजकीय विद्यालय
- एक केंद्रीय विद्यालय
- एक नवोदय विद्यालय
123 को नोटिस, 70 ने दिया जवाब : एआरटीओ
एआरटीओ लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि अवैध स्कूली वाहनों पर लगातार कार्रवाई जारी है। वैद्य स्कूली वाहनों की फिटनेस पर भी विशेष नजर है। हाल ही में फिटनेस प्रमाणपत्र लंबित होने के चलते 123 स्कूली वाहनों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से 70 वाहन स्वामियों ने जवाब दिये हैं या वाहनों की फिटनेस कराई है। वाहन सुविधा की अनिवार्यता को लेकर एक्ट में किस प्रकार की स्थिति है, इसके बारे में अध्ययन के बाद ही बताया जा सकेगा।