केंद्रीय विद्यालय की बिल्डिंग।
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लंबे समय से जिले में केंद्रीय विद्यालय का संचालन पुराने कलेक्ट्रेट भवन में संचालित है, लेकिन जिला प्रशासन अभी तक इस विद्यालय भवन के निर्माण के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं करा पाया है। इस स्कूल के बच्चे इस सत्र में भी सरकारी तौर पर कंडम घोषित हो चुके इस भवन में ही पढ़ने को मजबूर होंगे। इस भवन में उनकी जान और सेहत दोनों ही दांव पर रहेंगे। हालांकि सत्ता बदलने के बाद अभिभावकों को उम्मीद है कि नई सरकार इस गंभीर मुद्दे पर जरूर गंभीरता से विचार करेगी।
केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शिक्षा सत्र 2010 में हाथरस में केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत की थी, जिससे केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ स्थानीय गरीब और निर्बल वर्ग के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाई जा सके। फौरी तौर पर केंद्रीय विद्यालय के लिए पुरानी कलेक्ट्रेट के खाली भवन को दे दिया गया, लेकिन उसके बाद से केंद्रीय विद्यालय संगठन की लगातार मांग के बावजूद जिला प्रशासन जिले में विद्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं करा पा रहा।
इस कारण एक बार तो लोक निर्माण विभाग ने पुरानी कलेक्ट्रेट के भवन का 100 साल से अधिक निर्माण की अवधि होने के कारण भवन को कंडम घोषित कर दिया था, जिससे विद्यालय में केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से एडमिशन बंद कर दिए। विद्यालय केे विद्यार्थियों को आसपास के जिलों में शिफ्ट कर विद्यालय का संचालन बंद करने की चेतावनी भी दे दी गई। इसके बाद तत्कालीन डीएम ने लोक निर्माण विभाग के माध्यम से इस भवन की मरम्मत का कार्य कराया।
इसके बाद ही विद्यालय में एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो सकी, लेकिन अब भवन को लेकर लगातार विद्यालय प्रशासन को परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन भवन निर्माण के लिए अभी तक जिला प्रशासन भूमि उपलब्ध नहीं करा पाया है। ऐसे में नए सत्र में फिर से विद्यालय के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो सकता है, क्योंकि विद्यालय में मौजूदा समय में 11वीं तक की कक्षाओं का संचालन शुरू हो चुका है।
जिले में कहीं पांच एकड़ सरकारी भूमि है नहीं। नगर पालिका के सीवेज फॉर्म की जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन इसमें अभी तक नगर विकास विभाग ने परमीशन नहीं दी है। अगर कोई प्राइवेट जमीन देता है तो उस जमीन में सेंट्रल स्कूल का भवन बनवाया जा सकता है।
-अविनाशकृष्ण सिंह, डीएम