फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रक्त रंजित हो गया सादाबाद का चुनाव

Wed, 08 Feb 2017 11:36 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन
एसपी दिलीप सिंह एवं सीओ मनीषा सिंह बातचीत करते हुए - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मतदान से दो दिन पूर्व ही सादाबाद विधानसभा क्षेत्र का चुनाव रक्त रंजित हो गया है। सपा और बसपा के बीच अब तक चल रहा मुकदमेबाजी का खेल हिंसक घटनाओं तक पहुंच गया। 
विज्ञापन

सादाबाद विधानसभा में शामिल इगलास थाना क्षेत्र के गांव बगुली में हुए झगड़े की रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई थी कि बुधवार की सुबह सहपऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव मानिकपुर में फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। जमकर मारपीट और फायरिंग हुई, जिसमें एक शख्स की जान चली गई, जबकि दोनों पक्षों के करीब 10 लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।

घटना से मौके पर भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद डीएम और एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। बाद में आईजी और डीआईजी ने भी मौका मुआयना किया। इससे पूर्व भी सादाबाद में आगरा रोड पर सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल के भतीजे अतुल अग्रवाल के चालक ने पूर्व मंत्री के बेटे चिराग और उनके साथियों के खिलाफ हमला करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जबकि उसी दिन विधायक और उनके भतीजे के खिलाफ भी सादाबाद थाने में हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दो दिन पूर्व ही विधायक समर्थकों ने पूर्व मंत्री के भाई विनोद उपाध्याय के खिलाफ दो तहरीरें, जिन्हें जांच के बाद पुलिस ने खारिज कर दिया। लगातार हो रहीं इन घटनाओं से सादाबाद की फिजां में तनाव और दहशत का माहौल है। इस क्षेत्र का चुनाव पुलिस-प्रशासन के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। 
विज्ञापन


2004 के लोकसभा चुनाव की घटना हुई ताजा
 सहपऊ में चुनावी हिंसा की यह पहली वारदात नहीं है। इस घटना ने साल 2004 में हुई हिंसा की यादें ताजा करा दी हैं। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में भी ऐनवक्त पर सपा और भाजपा समर्थकों में टकराव हुआ था। उस समय सादाबाद विधानसभा क्षेत्र जलेसर लोकसभा क्षेत्र में आता था। उस समय सपा से एसपी सिंह बघेल एवं भाजपा से प्रत्येंद्रपाल सिंह उर्फ पप्पू भैया चुनाव मैदान में थे। घटना पांच मई 2004 की है। उस समय मानिकपुर के पास नगला समेल में पोलिंग बूथ पर कब्जे की शिकायत आई थी। भाजपा के कुछ कार्यकर्ता उस पोलिंग बूथ पर पहुंचकर पोलिंग ऑफिसर से बूथ पर कब्जे की शिकायत कर ही रहे थे कि अचानक सपा के समर्थकों का उनसे आमना-सामना हो गया था। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। एक पक्ष के कार्यकर्ताओं ने पास की दुकानों में जाकर बमुश्किल अपनी जान बचाई, जिसमें भाजपा के कुछ नेता भी घायल हो गए थे। बाद में दोनों के समर्थकों ने थाना घेर लिया और दोनों ओर से काफी देर तक फायरिंग होती रही। जब मौके पर काफी पुलिस बल आ गया। तब कहीं जाकर दोनों के समर्थक वहां से हटे थे। भागते समय सपा समर्थकों ने कई वाहनों को जला दिया एवं दुकानों से लूटपाट की। घायलों को कई दिनों तक आगरा में इलाज चलता रहा। दोनों ओर से कई लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।

शां‌त‌िपूर्ण चुनाव के दावों पर खड़े हुए सवाल
सहपऊ की घटना ने जिले भर में शांतिपूर्ण चुनाव को लेकर पुलिस और प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अफसोस तो यह है कि यह घटना बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बलों के जिले में आने के बावजूद हुई है। सवाल यह भी है कि इतने दिन से दोनों पक्षों के बीच टकराव की शिकायतें आ रही हैं, फिर भी पुलिस-प्रशासन ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम क्यों नहीं उठाए। यह सवाल इलाके की जनता को भी परेशान कर रहा है और यह चिंता भी सता रही है कि कहीं मतदान ऐसी घटना की और पुनरावृत्ति नहीं हो जाए। हालांकि हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सादाबाद की कानून-व्यवस्था संभालने के लिए अर्द्ध सैनिक बलों की मदद ली है। सादाबाद ही नहीं, बल्कि जिले के बेहद संवेदनशील माने जा रहे सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र में भी इस तरह की आशंका को मद्देनजर रखते हुए प्रशासन के लिए यहां शांतिपूर्ण चुनाव निपटाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। प्रशासन को सुरक्षा इंतजामों को लेकर अपनी रणनीति में फिर से बदलाव करने को मजबूर होना पड़ेगा। सबसे बड़ी चुनौती तो मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की होगी। यह भी देखना होगा कि मतदान के दिन दोनों पक्षों के समर्थक फिर से कहीं आमने-सामने नहीं आ जाएं। पुलिस-प्रशासन को अब दोनों प्रत्याशियों और उनके प्रचार में लगे लोगों की निगरानी भी बढ़ानी पड़ेगी। दरअसल, सादाबाद में दो चिर परिचित राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के आमने-सामने होने से प्रशासन को टकराव की आशंका तो थी, लेकिन टकराव इस कदर खूनी हो जाएगा, इसका अंदाजा कतई नहीं था। शायद तभी तो प्रशासन पिछले पांच दिनों से चल रहे मुकदमेबाजी के खेल को हल्के में लेता रहा। अब चिंता की बात यह भी है कि हिंसा का खेल क्या यहीं रुकेगा या फिर इसकी और प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।

देर रात हत्या में सहपऊ पुलिस ने दर्ज किया केस
कोतवाली सहपऊ क्षेत्र में मानिकपुर के निकट हुई विधायक देवेंद्र अग्रवाल एवं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के समर्थकों के बीच हुई गोलीबारी में हत्या के मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल व उनके पांच संबंधियों सहित 25-30 अन्य लोगों को नामजद किया गया है। देर रात सीओ सादाबाद मनीषा सिंह के नेतृत्व में काफी पुलिस फोर्स के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सादाबाद में कई जगह दबिशें दी जा रही थीं।

पुलिस को दी गई तहरीर में वादी के पिता रामहरी निवासी जारऊ का आरोप था कि विधायक देेवेंद्र अग्रवाल, उनके भाई राकेश अग्रवाल, भतीजे अतुल अग्रवाल, विधायक पुत्र चंदन अग्रवाल, ब्लॉक प्रमुख सहपऊ विनीत गुप्ता ने अपने 25-30 समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार में जा रहे चिरागवीर उपाध्याय और उनके काफिले पर हमला किया, जिसमें चिरागवीर उपाध्याय के साथ मौजूद उनके पुत्र पुष्पेंद्र के गोली लगी, जिसे उपचार के लिए आगरा ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तहरीर में कहा गया कि हमले में दूसरी गाड़ी में बैठे आलोक शर्मा, श्रीनाथ तिवारी, शशिकांत शर्मा व रामहरी के दूसरे पुत्र नागेंद्र के साथ भी मारपीट कर चोट पहुंचाई गई और अंधाधुंध फायरिंग कर मौके पर भय व्यासप्त कर दिया गया। सहपऊ पुलिस ने मामले की रिपोर्ट धारा 147,148,302,307,427 आईपीसी के तहत दर्ज की है। समाचार लिखे जाने तक दूसरे पक्ष की तरफ से इस मामले में कोई तहरीर नहीं आई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें