तमाम अड़चनों के बाद आखिर वह दिन आ ही गया। रविवार को हसायन क्षेत्र के गांव बसई से संजय जाटव की बारात धूमधाम से कासगंज के निजामपुर गांव के लिए रवाना हुई। धूमधाम से बारात की रवानगी के दौरान पुलिस के साथ-साथ तमाम बसपा नेता भी मौजूद रहे।
हालांकि अन्य दलों के नेताओं ने समारोह से दूरी बना ली।
तय तिथि के अनुसार संजय की बारात की रवानगी की तैयारियां रविवार की सुबह से ही शुरू हो गईं। करीब डेढ़ बजे संजय कार द्वारा निजामपुर के लिए रवाना हुआ। पुलिस सुरक्षा के बीच उसे कासगंज रवाना किया गया। अन्य लोग बस और अन्य वाहनों से कासगंज गए। गांव के लोगों और रिश्तेदारों को मिलाकर करीब 150 लोग बारात में शामिल हुए। गांव में धूमधाम से बारात चढ़ाई गई।
बारात में शामिल होने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि दलित विरोधी परंपरा को तोड़कर संजय ने मिसाल कायम की है। आजाद हिंदुस्तान में सभी को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। बारात में पूर्व विधायक और बसपा नेता अमर सिंह यादव, मनोज सोनी, जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र जाटव सहित कई नेता शामिल हुए।
डीएम के नाम से मशहूर हुआ संजय
इस प्रकरण के बाद संजय का नाम चर्चाओं में है। उसे लोग डीएम के नाम से पुकारते हैं। उसकी शादी की बात क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बनी हुई है। परिवार और समाज के लोग सकुशल बारात के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
यह था मामला
संजय की शादी कासगंज के गांव निजामपुर की युवती से करीब 10 माह पहले तय हुई थी। संजय को जानकारी हुई कि निजामपुर गांव में को दबंग लोग दलितों की बारात चढ़ने नहीं देते हैं। तभी से संजय ने ठान लिया कि वो इस परंपरा को तोड़ कर बारात लेकर जाएगा। प्रशासन से लेकर शासन तक उसने इस मामले में शिकायत की। उसकी मुहिम को उस समय झटका लगा जब प्रशासनिक अधिकारियों की जांच में लड़की की उम्र 18 वर्ष से छह माह कम निकली। छह माह पूरे होने के साथ उसकी शादी की तिथि 15 जुलाई 2018 तय हुई।
बुआ की शादी में हुुआ था पथराव, कई दुल्हनों की नहीं चढ़ सकी थी गांव में बारात
कासगंज। ग्राम निजामपुर में रविवार को हुई दलित युवती शीतल की शादी में पहली बार किसी दलित समाज की बारात ने पूरे गांव का भ्रमण किया। बारात प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्गों से गांव में होकर दुल्हन के घर तक पहुंची। गांव में जाटव समाज के 8, वाल्मीकि समाज का एक, कढ़ेरे समाज के छह और मुस्लिम समाज के तीन परिवार हैं। इसके अलावा 50 परिवार ठाकुर समाज के हैं। गांव में दलित समाज में होने वाली शादियों में बारात गांव के बाहर से चढ़कर दुल्हन के घर तक पहुंचती थी। इस शादी को लेकर प्रशासन ने बारात चढ़ाने के लिए रूट निर्धारित कर दिया था। बारात ने रूट के आधार पर लगभग पूरे गांव का भ्रमण किया। 20 साल पहले शीतल की बुआ राममूर्ति की शादी युवक संजय के भाई से हुई थी। बारातियों ने गांव से होकर बारात निकालने का प्रयास किया था लेकिन गांव में पथराव हो गया था।