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सबला है अबला नहीं नारी रचे जहान...

Sun, 12 May 2019 12:30 AM IST
Mohd Rafeek न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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अमर उजाला अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित काव्य संध्या में मंचासीन कवियित्री व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। शहर के पीसी बागला कॉलेज के मैदान पर चल रहे अमर उजाला कार्निवल में शुक्रवार को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत काव्य संध्या और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। शुभारंभ डीएम डॉ. प्रवीण कुमार लक्षकार और एडीएम अशोक कुमार शुक्ला ने मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में वाणीपुत्रों और कवियत्रियों ने अपनी रचनाओं से नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया। अमर उजाला के इस अभियान की जमकर सराहना की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि संगम के जिला संयोजक आशु कवि अनिल बौहरे और बृज कला केंद्र के अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की अहम भूमिका रही।

डीएम डॉ. प्रवीण कुमार लक्षकार ने कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। हर परीक्षा में महिला आगे हैं। महिलाओं का संघर्ष काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने इस मौके पर खुद कविता पढ़ी। डीएम ने अमर उजाला की इस पहल की काफी सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए। एडीएम अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि नारी पूज्य है, हमारी जन्मदाता है। नारी एक सागर है, जो सब कुछ समाहित करती है। कार्यक्रम में कवि और कवियित्रों ने नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया। कवि प्रभुदयाल दीक्षित प्रभु ने नारी है अपराजिता  नारी शक्ति निधान, सबला है अबला नहीं नारी रचे जहान, सुनाकर तालियां बटोरीं।
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प्रदीप पंडित ने नारी महिमा का बखान करते हुए कविता पेश की।
गाम गाम में प्रधान बनी नारियां, भारत की आन -बान -शान बनी नारियां।
रूबिया खान ने नारी सशक्तीकरण पर यह रचना प्रस्तुत की।
मां की ममता का तो कोई मोल नहीं होता है, तोल नहीं कोई इसका तो मोल नहीं होता है।
चारों धाम तुम पा जाओगे, नारी अपमान किया तो चैन नहीं फिर पाओगे।  
नीलम वार्ष्णेय ने नारी को परिवारों प्रतिष्ठा बताते हुए काव्य पाठ किया।
शिक्षिका रही कर्मठ नील नारी श्रद्धा है भारी, दो परिवारों की पूर्ण प्रतिष्ठा नील प्यारी।
डॉ. नितिन मिश्रा ने बेटियों को बोझ समझने वालों कटाक्ष करते हुए यह रचना प्रस्तुत की।
बेटियों को ये जहां बोझ समझ लेता है, उड़ने से पहले पिंजरे में जकड़ देता है।
डॉ. उपेंद्र झा की यह रचना सराही गई।

मुझको मारो नहीं गर्भ में, प्रेम का पृष्ठ बन जाऊंगी। अपने कोमल करों से तेरे विघ्न सारे हर जाऊंगी।
इसके अलावा राना मुनी प्रताप, बीके श्वेता बहन,  दीपक रफी के अलावा बाबा देवी सिंह निडर, कवियित्री मीरा दीक्षित ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य ऊषा गुप्ता ने की और संचालन आशुकवि अनिल बौहरे एवं चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने संयुक्त रूप से किया।
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