फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: नियम ताक पर, सेहत दांव पर... बिना लाइसेंस चल रहे 100 से ज्यादा आरओ प्लांट

विज्ञापन
कैंपर व टंकी में पानी लेकर जाते लोग। संवाद
विज्ञापन
जिस बोतल या कैंपर का पानी आप शुद्ध समझकर पी रहे हैं, उसे पीने से पहले देख लीजिए। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि जिले में पानी का स्याह कारोबार फल-फूल रहा है। वैसे से तो जिले में लगभग 120 आरओ प्लांट चल रहे हैं, लेकिन वैध लाइसेंस केवल आठ के पास ही है। बाकी के पानी के पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है।
विज्ञापन




पिछले वर्ष तक जिले में छह आरओ प्लांट ही ऐसे थे, जिनके पास लाइसेंस थे, इस साल दो नए लाइसेंस जारी किए गए हैं। हाथरस शहर में केवल चार लाइसेंस हैं, जिनकी क्षमता एक हजार एलपीएच क्षमता की है। अगर ये 15 घंटे भी काम करें तो प्रतिदिन 20 लीटर के 750 कैंपर ही सप्लाई कर सकते हैं।


चार प्लांट तीन हजार कैंपर सप्लाई कर सकते हैं, जबकि शहर में आठ से 10 हजार कैंपर की सप्लाई की जा रही है। पूरे जिले में यह आंकड़ा 25 से 30 हजार कैंपर का है। सप्लाई से साफ है कि मानकों के विपरीत चोरी-छिपे धड़ल्ले से आरओ प्लांट संचालित हैं।
विज्ञापन




न जांच होती और न बदले जाते फिल्टर

जानकार बताते हैं कि इन प्लांटों से सप्लाई होने वाले पानी में बैक्टीरिया, नाइट्रेट्स, आर्सेनिक और टीडीएस की मात्रा की जांच नहीं होती। यदि इनका स्तर गड़बड़ हो तो जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही आरओ मैंब्रेन व फिल्टर को समय से नहीं बदला जाता है।



इन बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

फिजीशियन डा. अवधेश कुमार ने बताया कि दूषित पानी से डायरिया, टाइफाइड, हैजा, हेपेटाइटिस ए व ई जैसी बामारियां हो सकती हैं। नाइट्रेट की अधिक मात्रा से पेट का कैंसर, किडनी फेलियर जैसे रोगों की संभावना बढ़ जाती है। आर्सेनिक की मात्रा हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देते हैं।


नकली बोतल और पाउच की बिक्री

केवल आरओ प्लांट ही नहीं बल्कि लोकल पैकेजिंग भी सेहत खराब कर रही है। बाजार में नामी कंपनियों के मिलते-जुलते नाम से नकली बोतलें और खुलेआम पानी के पाउच बेचे जा रहे हैं। इन बोतलों की सीलिंग से लेकर पानी की गुणवत्ता तक, कहीं भी मानकों का पालन नहीं हो रहा है।तालाब चौराहा, बस स्टैंड, सासनी गेट, जिला अस्पताल के आसपास आदि इलाकों में इनकी बिक्री हो रही है।


आरओ प्लांट स्थापित करने के नियम

- बिना ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंड्डर्स के प्रमाणन के पानी बेचना गैर-कानूनी है।

-पैकेटबंद पेयजल के आईएस 14543 मानक का पालन करना जरूरी है।

- खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण एफएसएसएआई से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

-भूजल निकासी के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण या स्थानीय जल बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना।

- जल निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना।



लाइसेंस पाने की प्रक्रिया

-पंजीकरण: सबसे पहले फर्म या कंपनी का पंजीकरण कराएं।

- पानी की जांच के लिए एक इन-हाउस लैब का निर्माण।

-बीआईएस आवेदन यानी आईएसआई मार्क के लिए आवेदन करें।

-अधिकारी प्लांट का निरीक्षण कर पानी के सैंपल लैब टेस्ट के लिए भेजेंगे।

- टेस्ट रिपोर्ट सही आने और सभी तकनीकी मापदंड पूरे होने पर लाइसेंस जारी होगा।




जल निगम के अनुसार पानी की शुद्धता का पैमाना

श्रेणी टीडीएस स्तर गुणवत्ता

सर्वोत्तम 50 - 150 पीने के लिए सबसे उपयुक्त

स्वीकार्य 150 - 300 ठीक है

औसत 300 - 500 पीने योग्य, पर स्वाद में अंतर

असुरक्षित 1200 से अधिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

इनका कहना है

निरीक्षण में सभी मानक देखने के बाद आरओ प्लांट संचालक के लिए जनपद में कुल आठ लाइसेंस दिए गए हैं। लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। यदि कोई प्लांट अवैध रूप से संचालित मिलता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन


रणधीर सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग

कैंपर व टंकी में पानी लेकर जाते लोग। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें