कांवड़ यात्रा के चलते लागू किए गए मार्ग परिवर्तन का असर अब रोडवेज बसों के संचालन पर साफ दिखाई देने लगा है। लंबे रूटों पर जा रहीं बसों को निर्धारित मार्ग छोड़कर दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया है। इसका सीधा असर यात्रियों की संख्या और परिवहन निगम की आय पर पड़ा है।
हाथरस डिपो से संचालित मुरादाबाद, हरिद्वार, बरेली और सोरों रूट की बसों में इन दिनों यात्रियों की संख्या आधे से भी कम रह गई है। मार्ग परिवर्तन और अतिरिक्त दूरी तय करने के कारण कई यात्री रोडवेज बसों के बजाय निजी और किराये के वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटे वाहनों को प्रशासन की ओर से निर्धारित शर्तों के साथ आवागमन की अनुमति मिलने से भी यात्रियों का रुझान उनकी तरफ बढ़ा है।
हाथरस डिपो से वर्तमान में मुरादाबाद के लिए छह, हरिद्वार के लिए छह, बरेली के लिए दो और सोरों के लिए चार बसों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि यात्रियों की कमी के चलते अधिकांश बसें पूरी क्षमता से नहीं भर पा रही हैं।
रोडवेज के हाथरस डिपो प्रभारी मंगेश कुमार का कहना है कि मार्ग परिवर्तन अस्थायी व्यवस्था है, जिसे कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुगम यातायात को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल होने के बाद स्थिति फिर सामान्य हो जाएगी। संवाद